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डोंगरगांव सीईओ के फैसले से बढ़ा संक्रमण का जोखिम, प्रायमरी कान्‍टेक्‍ट में आए कर्मियों को नहीं किया क्‍वारंटीन

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राजनांदगांव। जनपद पंचायत कार्यालय डोंगरगांव के कर्मियों को संक्रमण का डर सता रहा है। अब तक यहां से जनपद कार्यालय से 4 संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। बावजूद इसके मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी संत राम रावटे अन्‍य कर्मियों को दफ्तर बुलाते रहे। जबकि इनमें से कई संक्रमितों के प्रायमरी कान्‍टेक्‍ट में रहे। नियमत: प्रायमरी कान्‍टेक्‍ट में आने वाले कर्मियों को क्‍वारंटीन किया जाना था लेकिन ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया।

जब जिला पंचायत में कर्मी संक्रमित मिले थे तो जिला पंचायत कार्यालय बंद कर दिया गया था। प्रायमरी कान्‍टेक्‍ट में आए लोगों को घर से काम करने, क्‍वारंटीन रहने के आदेश थे। ऐसे निर्णयों के विपरित जनपद पंचायत डोंगरगांव के सीईओ अन्‍य कर्मियों का जोखिम बढ़ा रहे हैं। बताया जाता है कि वे कर्मियों के सामने अड़े हुए हैं कि उन्‍हें दफ्तर आना ही होगा।

8 सिंतबर को ही कार्यालय जनपद कार्यालय की एक महिला संक्रमित पाई गई थी। इसके बाद तीन और संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। स्थिति को देखते हुए और कर्मियों का जोखिम कम करने को लेकर फैसला लिया जा सकता था कि कुछ दिन कार्यालय बंद रहे और कर्मियों को क्‍वारंटीन किया जाए। मगर, सीईओ रावटे ने ऐसा कुछ नहीं किया।

जनपद पंचायत डोंगरगांव के कर्मी बताते हैं कि सीईओ महज अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। संक्रमितों के प्रायमरी कांटेक्‍ट में आने के बावजूद वे टेस्‍ट कराने से हिचकिचाते रहे। इसके बाद वे खुद भी क्‍वारंटीन नहीं हुए और लोगों से मिलते रहे। जबकि ऐसी गतिविधियां संक्रमण के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकती है। बताया यह भी जाता है कि कुछ ही महिनों में सीईओ रिटायर होने वाले हैं। इसके चलते भी वे छुट्टी पर जाने या छुट्टी देने के लिए राजी नहीं हैं।

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