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राजनांदगांव: बच्चों की सेहत बनाने में सुपरहिट हो रहे हैं ‘सजग के संदेश’ स्कूल, कॉलेज के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भी आया ऑडियो

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० महिला एवं बाल विकास के प्रयासों से गांव-गांव तक पहुंचा ऑडियो

 ० जागरूकता की दिशा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका की भूमिका अहम

राजनांदगांव। ‘सजग’। जैसा नाम है, वैसा ही इसका काम भी और तभी न सिर्फ महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसे हाथों-हाथ लिया है, बल्कि इसी ऑडियो क्लिप के संदेश अब जिले भर में तेजी से सुपरहिट भी हो रहे हैं। यह खास ऑडियो क्लीपिंग गांव-गांव में सुनी और सुनाई जा रही है, ताकि बेहतर लालन-पालन कर बच्चों की सेहत को सुदृढ़ बनाया जा सके। कोरोना संक्रमण का दौर एक ओर जहां कई के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, वहीं राजनांदगांव जिले में लोग महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयास से बच्चों को सेहतमंद जिंदगी देने के लिए लगातार प्रेरित भी हो रहे हैं। यह सारा कमाल दरअसल, ऑडियो क्लिप के माध्यम से सुनाए जा रहे प्रेरक ऑडियो संदेशों का है। यानी, बच्चों की उचित देखभाल और लालन-पालन की जानकारी माता-पिता तक अब ऑन-लाइन पहुंचने लगी है।

कोरोना संक्रमण के संभावित खतरे की वजह से जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन लगभग 7 महीने से बाधित है। लेकिन, इस दौरान भी खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं या शिशुवती माताओं की सेहत प्रभावित न हो, इसलिए समाजसेवी संस्था सेंटर फॉर लर्निंग रिसोर्सेस (सीएलआर) ने सजग नाम से पालकों के लिए संक्षिप्त ऑडियो संदेशों की श्रृंखला तैयार की है, इन ऑडियो संदेशों में माता-पिता के लिए सरल सुझाव दिए गए हैं, ताकि वह अपने बच्चों के लिए प्यार से अच्छी सेहत के लिए बेहतर वातावरण तैयार कर सकें। यह ऑडियो संदेश पालकों को सकारात्मक ऊर्जा तो प्रदान करते ही हैं, साथ ही उन्हें यह ज्ञान भी मिलता है कि बच्चों के समग्र विकास हेतु कठिन परिस्थितियों में भी वह क्या बेहतर कर सकते हैं। सजग ऑडियो कार्यक्रम का क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सीएलआर के द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में यूनिसेफ और एचसीएल फाउंडेशन भी सहयोग कर रहे हैं। इस तरह यह प्रेरक ऑडियो संदेश सुदूर अंचल में रह रहे पालकों तक भी अब सहजता से पहुंचाए जा रहे हैं।बाक्स…ऐसे पहुंचते हैं प्रेरक संदेशइस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, सजग नाम का यह आडियो क्लिप डायरेक्ट्रेट से प्रत्येक सोमवार की सुबह व्हाट्सएप के जरिए जिला अधिकारियों को भेजा जाता है।

जिला अधिकारियों से परियोजना अधिकारी, परियोजना अधिकारी से सुपरवाइजर और सुपरवाइजर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंचता है। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन संदेशों को पालकों को सुनाती हैं। उन्होंने बताया, जिन पालकों के पास व्हाट्सएप या स्मार्ट फोन जैसी सुविधाएं नहीं हैं, उनके घर तक जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं पालकों को संदेश सुनाकर उनसे चर्चा भी करती हैं। अब तक ऑडियो संदेशों की 24 कड़ियां प्रसारित की जा चुकी हैं और छोटे बच्चों में इसका सकारात्मक प्रभाव भी दिखने लगा है।वहीं सीएलआर की दुर्ग संभाग कार्यक्रम अधिकारी अमृता भोयर ने बताया, कोरोना संक्रमण जैसे कठिन समय में भी सजग कार्यक्रम पूरे छत्तीसगढ़ में क्रियान्वित किया जा रहा है और इसके ऑडियो संदेशों की श्रृंखला पूरे 35,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों से लगभग 5 लाख परिवारों तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह ऑडियो कार्यक्रम छोटे बच्चों की बेहतरी के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों का एक हिस्सा है। छत्तीसगढ़ के साथ ही बिहार, उत्तरप्रदेश व महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी क्षेत्रीय बोली-भाषा में तैयार किए गए इस एप को वाट्सएप के जरिए प्रसारित किया जा रहा है।

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