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राजनांदगांव : रीति-रिवाज, परंपरा, वेशभूषा व संस्कृति से परिचित हुए

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डोंगरगढ़  छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय सेवा योजना के 10 स्वयंसेवकों ने हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय पाटन में 8 से 14 नवंबर तक आयोजित राष्ट्रीय एकता शिविर में अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय बिलासपुर की संगठन व्यवस्था में हिस्सा लिया। शिविर में छत्तीसगढ़ के दल प्रभारी के रूप में कार्यक्रम अधिकारी शत्रुहन धृतलहरे थे। शिविर के द्वितीय दिवस में पकृति की देन फूल, पत्तियों, रेत, कोयला, धान से छत्तीसगढ़ माता का शोभामय चित्र अलंकृत किया गया जो कि प्रकृति की विशेषता को प्रदर्शित करता है। तीसरे दिवस को सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ के स्वयंसेवकों ने छत्तीसगढ़ के लोककला, सांस्कृतिक विधा में छत्तीसगढ़ माता का गुणगान, कर्मा, ददरिया, पंथी, सुआ, राउत नाचा एवं बारहमासी गीतों व नृत्य के माध्यम से अपने सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित किया। छत्तीसगढ़ का अभिवादन-जय जोहार जय, छत्तीसगढ़ व छत्तीसगढ़ी नारा छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया का उद्घोष राष्ट्रीय स्तर पर कर छत्तीसगढ़ का मान सम्मान बढ़ाया। शिविर में कार्यशाला, शैक्षणिक सत्र, सामूहिक चर्चा के विभिन्न गतिविधियां हुए जिनमें स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिए। स्थानीय दर्शन में स्वयंसेवकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गांव वडनगर, विश्व धरोहर स्थल रानी की वाव, मोढेरा का सूर्य मंदिर का भ्रमण किया। राष्ट्रीय एकता शिविर में अन्य 10 राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश के स्वयंसेवकों के बोली-भाषा, रहन-सहन, रीति-रिवाज,परंपरा, खानपान वेशभूषा और लोक कला संस्कृति से परिचित हुए व गरबा का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। अनेकता में एकता भारत की विशेषता को दर्शाया गया। शिविर में छत्तीसगढ़ से दीपक राठौर, सन्नी जगताप, विद्यांशी भोई, सेतकुमार कोसरिया, दीक्षा वैष्णव,चेतनानंद साहू,माधुरी ठाकुर,अजय यादव,मधुलिका जायसवाल,हेमा कचलामे ने अपनी सहभागिता निभाई।तथा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक धरोहर का नेतृत्व अजय यादव व दीक्षा वैष्णव ने किया। शिविर के समापन अवसर पर स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार से सम्मानित किया गया।राष्ट्रीय एकता शिविर में सफल सहभागिता के लिए शासकीय कुंज बिहारी चौबे महाविद्यालय लाल बहादुर नगर के प्राचार्य डॉ. आरके ठाकुर, कार्यक्रम अधिकारी प्रो. बीआर चन्द्रवंशी एवं समस्त अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दी।

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