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CG : पहाड़ों, पठारों से कल-कल कर प्रवाहित होते झरनों की सुरीली धुन पर्यटकों को कर रही आकर्षित…

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जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाने वाला जशपुर जिला प्राकृतिक सौंदर्य, वनसपंदा और अलौकिक हरितिमा से परिपूर्ण है। प्रकृति के गोद में बसे जिला होने से यहां पर पहाड़ों, पठारों और उसमें से प्रवाहित होती झरनों की खूबसूरती ऐसा नजारा पेश करती हैं मानों अमीर खुसरो की उस प्रसिद्ध पंक्ति की तरह अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो वह यही है, यही हैं। 

नया साल या अन्य अवसरों में यह झरना पर्यटकों से गुलजार रहता है। यहां के प्रमुख झरने रानीदाह जलप्रपात, दमेरा, राजपुरी, दनगरी, गुल्लू जलप्रपात में लोग दूर-दूर से घूमने के लिए आते हैं और यहां की खूबसूरत यादों को अपने साथ लेकर जाते हैं। इस साल पर भी नववर्ष के अवसर पर हजारों की संख्या में पर्यटक नववर्ष का अभिवादन करने अपने परिवार और स्वजनों के साथ इस उत्सव को मनाने यहां पहुंचे थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव की मंशानुरूप प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों से भरपूर छत्तीसगढ़ को पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। सरकार न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठा रही है, बल्कि इस क्षेत्र में योगदान देने वालों को उचित सम्मान और प्रोत्साहन भी देने की घोषणा की है।

रानीदाह जल प्रपात जिले के प्रमुख जलप्रपातों में से एक है। जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों एवं पहाड़ों के बीच स्थित यह सुंदर मनमोहक झरना और पिकनिक स्पॉट है। वर्षा ऋतु में यहां का नजारा बहुत ही आकर्षक दिखता है। पहाड़ों और पठारो से घिरा रानीदाह गरिमा नदी के किनारे है, जो वहां एक छोटी सी झील बनाती है। रानीदाह जल प्रपात के संबंध में यह ऐतिहासिक किवदंती प्रचलित है कि यहाँ उड़ीसा प्रांत की राजकुमारी सिरोमणि ने अपनी इच्छा के विरुद्ध विवाह के प्रस्ताव से नाराज होकर, झील में कूदकर अपने प्राण दे दी थी, इसी लिए इस स्थान का नाम रानीदाह पड़ा ।

दमेरा जशपुर नगर के दक्षिण में 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यटन की दृष्टि से प्रसिद्ध दमेरा में झरनें, नदी और पहाड़ियों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहाँ प्रति वर्ष राम नवमी और कार्तिक पूर्णिमा को मेला भी लगता है।

राजपुरी जलप्रपात बगीचा ब्लॉक में स्थित है। यह जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर है। इस जलप्रपात में लगभग 80 फीट से जल धारा गिरती है। यहाँ भगवान शिव का मंदिर भी है। सावन के महीने में हजारों श्रद्धालु राजपुरी पहुंच कर भगवान शिव का जलाभिषेक करते है और वहां के मनोरम प्राकृतिक दृश्य का आनंद उठाते है।

गुल्लू जलप्रपात मनोरा ब्लॉक में स्थित है। जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूरी पर स्थित नैसर्गिक सुंदरता से परिपूर्ण यह जलप्रपात चट्टानों के बीच प्रवाहित होते हुए अद्भुत नजारा पेश करती है। इसका उद्गम ईब नदी से है।

दनगरी जल प्रपात बगीचा ब्लॉक में भड़िया से दनगरी जाने वाले मार्ग पर स्थित है। जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूरी पर स्थित यह जलप्रपात जिले का सबसे ऊंचा और मनोरम जल प्रपात है। इसे त्रि-जलप्रपात भी कहा जाता हैं, क्योंकि इस जल प्रपात से पानी तीन चरणों में गिरता है। यह जलप्रपात घने जंगल और घाटियों से घिरा है।

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