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बाघ की चहल कदमी शिकारीटोला और ढ़ारा से सटे जंगल के समीप नजर आई

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राजनांदगांव, 27 दिसंबर। खैरागढ़ वन मंडल के तिलईभाट में दिखे बाघ की खोजबीन में जुटे वन अमला अब भी पदचिन्हों के आधार पर बाघ की तलाश कर रहा है। कल बीती रात 8 बजे के आसपास शिकारीटोला गांव में बाघ की दहाड़ सुनाई दी । इस आधार पर वनकर्मी बाघ की तलाश में रविवार सुबह से जुट गए हैं।मिली जानकारी के मुताबिक पदचिन्हों के जरिये बाघ के होने की पुख्ता पुष्टि होने के बाद अलग-अलग टीमें सरगर्मी से पूरे इलाके में सर्चिंग अभियान चला रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी भी कराई गई है। बताया जा रहा है कि रात करीब 8 बजे बाघ की मौजूदगी वाले गांव से लेकर संभावित रास्तों पर टीमें हाईअलर्ट में है।

रात को बाघ लंबा सफर करते हुए आगे बढ़ते हैं। अभी तक बाघ के द्वारा किसी भी हिंसक वारदात की सूचना नहीं है। वन अमले का आंकलन है कि संभवत: बाघ का पेट भरा हुआ है। एक बार शिकार करने के बाद बाघ करीब सप्ताहभर बिना भोजन के रह सकते हैं। खैरागढ़ वन मंडल के दर्जनों गांव के खेतों में विशेषज्ञों ने पदचिन्ह देखा है। खेतों में पड़े निशान के आधार पर बाघ की मौजूदगी की प्रमाणिक पुष्टि हुई है। बाघ की ऊंचाई करीब 3 फीट है। रविवार को दोपहर तक बाघ की चहल-कदमी शिकारीटोला और ढ़ारा से सटे जंगल के समीप नजर आई है। माना जा रहा है कि जंगल में दाखिल होने की स्थिति में बाघ की सुरक्षा पर भी खतरा नहीं रहेगा। वहीं ग्रामीणों से वन महकमे ने एहतियात बरतने की अपील की है।

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