Site icon

यूपी: कौन लेकर जाए कोरोना संक्रमित का शव, दो डीएम उलझे

1211

इसे कोरोना का खौफ ही कहेंगे कि यूपी के रामपुर के टांडा निवासी 75 वर्षीय कारोबारी का शव नियमों को लेकर दो जिलों को डीएम के आमने-सामने आ गए। इसके चलते लगभग 20 घंटे तक शव टीएमयू अस्पताल में पड़ा रहा। कारोबारी ने कोरोना वायरस की चपेट में आकर रविवार को दम तोड़ दिया था। 
सोमवार की रात लगभग 11 बजे आई रिपोर्ट में कारोबारी को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। रामपुर के जिला अधिकारी का कहना था कि कारोबारी की मौत मुरादाबाद में हुई है। लिहाजा डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार वहां के प्रशासन को शव को भिजवाने का इंतजाम करना चाहिए। 

उधर, मुरादाबाद के डीएम राकेश कुमार सिंह का कहना था कि गाइडलाइंस के मुताबिक जिस जिले का शव होगा वहां के अधिकारी द्वारा गृह जनपद तक ले जाने के लिए अधिकारी नामित किया जाना था। रामपुर से शव ले जाने के लिए किसी भी अधिकारी को अधिकृत नहीं किया गया था। 

अंतिम संस्कार में सावधानियां बरतने का निर्देश हैं जिसकी जिम्मेदारी संबंधित मजिस्ट्रेट और पुलिस की होती है। दोनों डीएम के आमने-सामने आने की वजह से शव अस्पताल में ही पड़ा रहा। रात लगभग साढ़े सात बजे बनी सहमति बनी और मुरादाबाद प्रशासन ने शव को रामपुर की सीमा तक पुलिस सुरक्षा में भिजवाया।

वहां से रामपुर पुलिस की सुरक्षा में शव को टांडा लाकर लगभग साढ़े आठ बजे दफनाया गया। दरअसल टांडा के एक बुजुर्ग कारोबारी को सांस संबंधी पुरानी दिक्कत थी। कुछ दिन पहले उनकी दिक्कत और बढ़ गई थी तो उनके परिजन उनको मुरादाबाद के एक निजी चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने उनको टीएमयू मेडिकल कॉलेज जाने की सलाह दी। 
कारोबारी वहां पहुंचे तो डॉक्टरों ने वहां उनको शुक्रवार को भर्ती कर लिया था। कोरोना जैसे लक्षण लेकर उनके सैंपल भी जांच को भेज दिए थे। इलाज के दौरान ही उनकी रविवार की रात मौत हो गई। उनकी कोरोना की रिपोर्ट नहीं आई थी, लिहाजा परिजनों को शव नहीं सौंपा गया। सोमवार की रात रिपोर्ट आई जिसमें उनको कोरोना पॉजिटिव बताया गया।

उनके कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद से ही कारोबारी के शव को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के गाइड लाइन के मुताबिक उनके गृह नगर भेजे जाने की कवायद शुरू की गई। डब्लूएचओ की गाइड लाइन के मुताबिक एंबुलेंस मंगा ली गई, अन्य व्यवस्था भी कर ली गई। 

Exit mobile version