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उच्च न्यायालय के जजों को मिलेगी होटल में क्वारंटीन की सुविधा, 100 कमरों का कोविड केयर सेंटर तैयार

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दिल्ली सरकार ने राजधानी के एक होटल में दिल्ली उच्च न्यायालय के जजों, अन्य न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवार के लिए 100 कमरों का कोविड केयर सेंटर बनाने का फैसला किया है। चाणक्यपुरी एसडीएम ने इस बाबत आदेश जारी कर दिया है।

 आदेश के मुताबिक, प्राइमस अस्पताल इस कोविड केयर सेंटर का संचालन करेगा। डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने का काम अस्पताल ही करेगा। वहीं खाना और कमरों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी होटल की होगी। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए उच्च न्यायालय ने एक कोविड केयर सेंटर बनाने का अनुरोध किया था। इसके तहत ही दिल्ली सरकार ने चाणक्यपुरी में स्थित एकहोटल में यह कोविड-केयर सेंटर बनाने का फैसला किया है।

जांच घटने पर भी कम नहीं हो रहे संक्रमण के मामले
राजधानी में जांच घटने के बावजूद कोरोना के दैनिक मामलों में कोई खास गिरावट नहीं हो रही है। अब पहले के मुकाबले प्रतिदिन 25 हजार टेस्ट कम हो रहे हैं। इसके बावजूद संक्रमितों की संख्या नहीं घट रही है। पिछले 10 दिनों से संक्रमण दर 30 फीसदी से अधिक बनी हुई है।

दिल्ली में इस समय रोजाना औसतन 75 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं । जबकि 17 अप्रैल तक एक लाख से अधिक जांच की जा रही थी। तब एक लाख जांच पर औसतन 24 हजार मामले का रहे थे, और अब 75 हजार जांच होने पर भी करीब 24 हजार मामले ही प्रतिदिन आ रहे है। कुल जांच घटने से आरटी पीसीआर टेस्ट भी अब कम किए जा रहे हैं। पहले जहां रोजाना औसतन 70 हजार आरटी-पीसीआर टेस्ट हो रहे थे। अब सिर्फ 45 हजार हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी का कहना है कि इस समय लक्षण वाले लोगों की जांच करने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि यह लोग गंभीर स्थिति में न पहुंचे और समय से पहले इनकी जांच रिपोर्ट मिल जाए।

अधिकारी के मुताबिक इस समय कंटेनमेंट जोन पर भी अधिक ध्यान दिया जा रहा है। रैंडम जांच पर फोकस न करके लक्षण वाले रोगियों की पहले जांच की जा रही है। सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि जांच कम करना इस समय एक सही निर्णय है। क्योंकि बिना लक्षण वाले लोगों का टेस्ट करने का फिलहाल कोई फायदा नहीं है। जरूरी है कि जिन लोगों में लक्षण दिखाई दे रहे हैं उनकी जांच पहले की जाए। ऐसा करने से सरकार के पास उपलब्ध संसाधन की भी कोई कमी नहीं होगी और विभिन्न लैब पर जांच का दबाव भी नहीं पड़ेगा।

कोरोना के दैनिक मामलों में कब तक गिरावट आ सकती है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी यह कहना मुश्किल है कि संक्रमण का ग्राफ कब तक नीचे आएगा। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि मई के दूसरे सप्ताह की शुरुआत में मामलों में कमी आने लगेगी।

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