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देखरेख में रुचि नहीं, खराब हो गए सार्वजनिक शौचालय

04_06_2021-3_raj_11

राजनांदगांव । शहर में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बदहाल है। देखरेख के अभाव में शौचालयों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। नगर निगम क्षेत्र में 30 से अधिक सार्वजनिक शौचालय हैं। कुछ महीनों से इन शौचालयों को शुल्क मुक्त कर दिया गया है। संचालकों को शासन से मेंटेनेंस के लिए राशि दी जा रही है। शुल्क मुक्त होने पर कमाई कम होने के कारण संचालक अब मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नतीजतन शौचालय की स्थिति बदतर होती जा रही है। कई जगह तो शौचालय सिर्फ नाम का रह गया है। देखभाल करने वाला कोई नहीं है। खासकर श्रमिक बहुल वार्डों के शौचालयों की स्थिति काफी खराब है।

शहर में पहले सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करने के लिए लोगों को दो से पांच रुपये तक देने पड़ते थे। अब कुछ महीनों से निश्शुल्क उपयोग किया जा रहा है। कई शौचालयों के गेट और टाइल्स तक टूट चुकी है। कुछ में पानी के अभाव में ताले लगे हुए हैं। स्थिति तो इतनी खराब हो गई है कि कई जगहों के शौचालय में जाने के बदले लोग बाहर शौच जाना पसंद करते है। दरवाजे, कुंडी तक गायब हैं। कुछ जगह तो लोग शौचालय का इस्तेमाल लोग अपने वाहन को रखने में कर रहे हैं। शौचालयों में सफाई नाम की तो कोई चीज ही नहीं है। अगर नगर निगम ध्यान देता तो सभी शौचालयों में सफाई होती, लेकनि उदासीनता के कारण आज यह हालत है। नया ढाबा, शंकरपुर, चिखली, गोठान पारा, नंदई, बंजगपुर नवागांव, अस्पताल चौक आदि कई जगहों के शौचालय अत्यंत खराब हो चुके हैं। इन्हें दुरुस्त कर दिया जाए तो उपयोग के लायक हो सकते हैं।

स्वच्छ शहर की उम्मीदों पर पानी फेर रहे

सामुदायिक शौचालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही नगर निगम प्रशासन की उम्मीदों पर भी पानी फेर रहे हैं। कई शौचालयों में तो पानी की ही व्यवस्था नहीं है। अपेक्षित सफाई का अभाव है। दिव्यांगों के लिए आरक्षित कमरे में हमेशा ताला जड़ा रहता है। जरूरत पड़ने पर भी नहीं खोला जाता। ग्रेडिंग के लिए जो उपकरण लगाए गए थे, वह भी लंबे समय से बंद पड़े हैं। आम लोगों की शिकायत है कि नगर निगम की टीम इन शौचालयों में झांकने तक नहीं जाती। इस कारण भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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