Site icon

राजनांदगांव : संवेदनशील हिस्सों की लिस्टिंग, वार्डों-गांवों में उपद्रवियों की पहचान, महिलाओं से भी मांगे सुझाव…

2

राजनांदगांव , जिले में अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने नया प्रयोग किया है। शहर के वार्डों से लेकर पंचायतों तक गंुडे, बदमाशों और उपद्रवियों की लिस्टिंग की जा रही है। ऐसे नाबालिगों की भी पहचान कर रही, तो लगातार आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं। जिनकी लगातार मॉनिटरिंग पुलिस करेगी।

इसके लिए पुलिस शहर से लेकर गांव तक चलित थाना लगा रही है। जिसमें संबंधित क्षेत्र में होने वाले अपराध, इनमें संलिप्त अपरा​धियों और अपराध के लिहाज से संवेदनशील हिस्सों की सूची तैयार की जा रही है। यह अभियान फरवरी तक चलेगा। जिसमें मिली शिकायतों, अपराध की प्रवृत्तियों और आदतन बदमाशों की संख्या का पूरा डाटा बेस तैयार होगा। जिससे अपराध क्षेत्र और आदतन बदमाशों की मानिटरिंग हो सकेगी।

इसके अलावा किसी घटनाक्रम की स्थिति और इसकी संभावना पर त्वरित एक्शन भी लिया जा सकेगा। इसके लिए चलित थानों के माध्यम से गांवों में पहुंच रही पु​लिस गांव के महिलाओं और वरिष्ठों से भी सुझाव मांग कर रही है। ताकि अपराध नियंत्रण के​ ​लिए जनसहयोग पर भी बड़ा फोकस रह सके।

संवेदनशील हिस्सों को 3 कैटेगरी में बांट निगरानी चलित थानों में मिलने वाले डाटा के आधार पर पुलिस संवेदनशील हिस्सों के तीन कैटेगरी में बांटेगी। इसमें येलो जोन, रेड जोन और ग्रीन जोन शामिल होंगे। अत्यधिक अपराध वाले ​क्षेत्र को रेड जोन में रखा जाएगा। वहीं जिन हिस्सों में मामूली घटनाक्रम होते हैं, उन्हें येलो जोन में रखने की तैयारी है। इसके साथ ही वर्गीकरण के बाद इन हिस्सों की नियमित मानि​टरिंग और अपराध को नियंत्रित करने के​ लिए किए जाने वाले कामों पर फोकस किया जाएगा।

स्थानीय लोगों से भी संवाद किया जा रहा शहर से लेकर गांव तक चलित थाने लगाए जा रहे हैं। इसमें स्थानीय लोगों से भी संवाद किया जा रहा। अपराध में शामिल लोगों की लिस्टिंग की जा रही है। वहीं संवेदनशील हिस्से भी चिन्हित किए जा रहें। इसके कई समस्याओं का त्वरित निराकरण भी किया जा रहा है। अंकिता शर्मा, एसपी

संवाद-सुझाव से मुद्दों की पहचान, सुलझा भी रहे हैं पुलिस चलित थानों से ग्रामीणों से संवाद भी कर रही है। इसमें खासकर महिला वर्ग को गांव की समस्या और शिकायतें पूछी जा रही है। वरिष्ठ भी अपनी बातें रख रहे हैं। इस संवाद के माध्यम से पुलिस ग्राम स्तर पर मुद्दों की पहचान कर रही है। इसे बकायदा रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। मुद्दों और समस्याओं की पहचान होने के बाद इसमें सुधार की शुरुआत की जा रही है। कई मामलों को तत्काल स्थानीय स्तर पर सुलझाए भी जा रहे हैं।

सीधा संपर्क नहीं होने से बिगड़ रहे थे हालात ग्रामीण इलाकों में कुछ सालों में अपराध का ग्राफ बढ़ा है। इनमें मारपीट, मामूली विवाद पर बलाव, उपद्रव और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर घटनाएं शामिल है। थानों में समिति संख्या में मौजूद पुलिस बल की वजह से हर गांव में पुलिस का सीधा संपर्क भी नहीं हो रहा था। जिसकी वजह से अपराध नियंत्रण के लिए ठोस प्लान नहीं बन पा रहा था। इस प्रयोग के माध्यम से पुलिस ने हर गांव में सीधे संवाद की तैयारी की है। वहीं बड़ा डाटा बेस भी तैयार किया जा रहा है। जो आगे बड़ी मददगार साबित होगी।

Exit mobile version