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10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा से पहले साइबर फ्रॉड अलर्ट, पुलिस की चेतावनी

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 भोपाल.
 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रों के सामने एक नए तरह का इम्तिहान खड़ा हो गया है। यह परीक्षा क्लासरूम में नहीं, बल्कि इंटरनेट और इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर होगी, जहां पेपरलीक, परीक्षा में नंबर बढ़ाने अथवा प्रवेश पत्र में सुधार कराने के नाम पर साइबर ठगों का जाल सक्रिय हो रहा है। इस खतरे को देखते हुए भोपाल पुलिस ने न केवल कार्रवाई तेज की है, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के लिए साइबर एडवाइजरी भी जारी की है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हर साल बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले इस तरह की ठगी के मामले सामने आते हैं। ठग फर्जी टेलीग्राम चैनल बनाकर दावा करते हैं कि उनके पास 10वीं-12वीं के प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध हैं। चैनलों के नाम और प्रोफाइल इस तरह तैयार की जाती हैं, जिससे वे वास्तविक प्रतीत हों।

छात्रों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि यह बोर्ड परीक्षा का पेपर है और उन्हें यह व्यक्तिगत रूप से मिल रहा है। इसके बदले उनसे 500 से 2000 रुपये तक ऑनलाइन माध्यम से वसूले जाते हैं।

भोपाल पुलिस का कहना है कि यह पूरी तरह फर्जी दावा होता है। न तो कोई पेपर लीक होता है और न ही ठगों के पास प्रश्नपत्र होते हैं। भुगतान के बाद या तो छात्रों को ब्लॉक कर दिया जाता है या फिर उन्हें पुराने वर्षों के पेपर भेज देते हैं।

पुलिस ने साफ कहा है कि यदि कोई व्यक्ति या चैनल प्रश्नपत्र बेचने का दावा करता है, तो उसकी तुरंत शिकायत की जाए। साइबर सेल के एसआई अंकित नायक ने बताया कि बीते दो वर्षों में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ऐसे दो बड़े मामलों का खुलासा कर चुकी है।
ऐसे नेटवर्क से ठगी का जाल

केस-1

छिंदवाड़ा जिले के दमुआ से गिरफ्तार किया गया दीपांशू कोरी नीट की तैयारी कर रहा था और उसने कॉलेज से ड्रॉप लिया हुआ था। उसने टेलीग्राम पर फर्जी पेपरलीक चैनल बनाया, जिसमें एक लाख से अधिक लोग जुड़े थे। जांच में सामने आया कि उसने सैकड़ों छात्रों से ठगी की और 500 से 2000 रुपये तक लेकर पेपर उपलब्ध कराने का दावा करता था।

केस-2

भिंड जिले से पुलिस ने 19 वर्षीय आरोपित शिवम यादव को गिरफ्तार किया था। उसके टेलीग्राम चैनल से 20 हजार से अधिक लोग जुड़े थे। वह बोर्ड परीक्षाओं के पेपर एक हजार रुपये में बेचने का दावा करता था। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
बचने के लिए पुलिस की यह सलाह

बचने के लिए पुलिस की यह सलाह

पेपरलीक के नाम पर कोई भी दावा पूरी तरह फर्जी है। छात्र और अभिभावक ऐसे चैनलों से दूर रहें, पैसे न भेजें और तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दें। शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच।

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