Site icon

WTC के फॉर्मेट को लेकर सचिन बोले- बेस्ट ऑफ थ्री होना चाहिए था फाइनल, दो स्पिनर्स के साथ उतर सकता है भारत

15

नई दिल्ली. भारत और न्यूजीलैंड के बीच गुरुवार से साउथम्पटन में वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का फाइनल खेला जाएगा. मुकाबला टेस्ट की नंबर-1 और नंबर-2 टीमों के बीच है. इस पर पूरी दुनिया की नजर है. हालांकि, फॉर्मेट को लेकर जरूर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसे लेकर सीएनएन न्यूज 18 ने पूर्व भारतीय कप्तान और 100 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाले इकलौते बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से बात की. उन्होंने भारतीय टीम के संभावित प्लेइंग-11, इंग्लैंड के कंडीशंस और टेस्ट चैंपियनशिप के फॉर्मेट पर तफ्सील से अपनी राय जाहिर की. आप भी पढ़िए सचिन के आखिर क्या कहा.

सवाल: विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के फॉर्मेट को लेकर काफी बात हो रही है. कई लोग बेस्ट ऑफ थ्री फाइनल की बात कह चुके हैं. आपका क्या मानना है?

सचिन: आईसीसी को विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल के फॉर्मेट को लेकर जरूर काम करना चाहिए. ताकि फाइनल एक मैच का नहीं, बल्कि सीरीज की तरह खेला जाए. जब आप 50 ओवर का विश्व कप या टी20 चैम्पियनशिप खेलते हैं, तो आप किसी भी टीम से एक बार भिड़ते हैं. ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस पूल में हैं. इसमें एक निरंतरता होती है और फिर आप फाइनल खेलते हैं. उस स्थिति में, एक फाइनल मैच होना सही है. लेकिन डब्ल्यूटीसी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया से चार और इंग्लैंड से भी इतने ही मैच खेले और फिर आप अचानक फाइनल में पहुंच जाते हैं. जहां सिर्फ एक मैच ही खेला जाना है. जोकि गलत है.

ये डब्ल्यूटीसी फाइनल सीरीज होनी चाहिए. ऐसे में बेस्ट ऑफ थ्री मैच सही होते. यह तय किया जा सकता है कि आप उन मैच को कैसे खेलते हैं- एक घर में, एक विदेश में या जो भी तय होता. मुझे लगता है कि आईसीसी के सामने भी कई चुनौतियां रही होंगी. समय के साथ वो जरूर इसका समाधान निकाल लेंगे.
सवाल: विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल से पहले इंग्लैंड के मौसम और कंडीशंस पर बहुत चर्चा हो रही है, फाइनल में कंडीशंस का कितना बड़ी भूमिका हो सकती है?

सचिन: कंडीशंस की इंग्लैंड में बड़ी भूमिका होती है. अगर पिच में घास है और आसमान में बादल छाए हुए हैं, तो फिर आपको शुरुआत में संभलकर खेलना होगा. एक बार आंखें जम जाने के बाद अब तेजी से रन बना सकते हैं. साउथम्पटन की पिच पर बल्लेबाजी की जा सकती है. फाइनल में भी कंडीशंस की भूमिका अहम होगी. पिच और बाउंस सिर्फ टीम इंडिया के लिए नहीं, बल्कि न्यूजीलैंड के लिए भी परेशानी हो सकती है.

सवाल: लोग ऐसा मान रहे हैं कि टीम इंडिया विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप में अंडर डॉग है. इस पर आपका क्या कहना है?

सचिन: नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है. टीम इंडिया ने काफी अच्छी क्रिकेट खेली है. अगर आप पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे की ही बात करें तो करीब आठ-दस खिलाड़ी टीम से बाहर थे. उस समय बेंच पर बैठे खिलाड़ियों को मौका दिया गया. इसमें से कुछ तो सिर्फ नेट बॉलर की तरह टीम के साथ आए थे. लेकिन उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया. इससे पता चलता है कि टीम इंडिया के पास कितना टैलेंट है. इसलिए हम अंडरडॉग नहीं है. लेकिन ये बात सही है कि हमें मैच खेलने का मौका नहीं मिला है. न्यूजीलैंड के साथ अच्छी बात है कि उसने फाइनल से पहले इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट खेले हैं. वहीं, भारतीय टीम को मैच खेलने का मौका नहीं मिला है.

सवाल: टीम इंडिया का मौजूदा गेंदबाजी आक्रमण अब तक का सबसे बेहतर माना जा रहा है. क्या आपको लगता है कि विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में यही सबसे बड़ी ताकत होगी?

सचिन: मुझे तुलना पसंद नहीं है. मौजूदा गेंदबाजी आक्रमण में काफी विविधता है. मोहम्मद शमी तेजी से गेंदबाजी करते हैं. बुमराह का एक्शन एकदम अलग है. इशांत ऊंचे कद के गेंदबाज हैं. उमेश और सिराज भी हैं. सभी एक दूसरे से अलग हैं. एक पैकेज के रूप में ये सभी कमाल के गेंदबाज हैं.

सवाल: क्या आपको लगता है कि भारत को प्लेइंग-11 में रविचंद्नन अश्विन और रविंद्र जडेजा को शामिल करना चाहिए?

सचिन: मैं प्लेइंग-11 तो नहीं बता सकता हूं. क्योंकि मैं हजारों किलोमीटर दूर बैठा हूं. न मैंने प्रैक्टिस मैच देखा है. टीम मैनेजमेंट को पता होगा कि कौन खिलाड़ी कैसा नजर आ रहा है. अश्विन और जडेजा के साथ बड़ा फायदा ये है कि दोनों बल्लेबाजी भी कर लेते हैं और पहले कई मौकों पर वो ये दिखा भी चुके हैं. निचले क्रम में आकर ये साझेदारी कर सकते हैं. ऐसे में दोनों को खिलाना अच्छा विकल्प हो सकता है.

Exit mobile version