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CG : वाहन क्लेम रोकना बीमा कंपनी को महंगा पड़ा, आदेश – तत्काल करे 10 लाख भुगतान …

CG: Another murder incident in Mandir

रायपुर। चोरी वाहन का क्लेम करीब 10 साल लटकाए रखने वाली बीमा कंपनी पर उपभोक्ता आयोग ने 10 लाख का जुर्माना लगाया है। बीमा कंपनी क्लेम देने से बचने दस्तावेज अपूर्ण बता रही थी, जबकि शिकायतकर्ता ने सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज कर दी है।

कंपनी को निर्देश दिया है कि वह चोरी हुए वाहन के एवज में उपभोक्ता को बीमित राशि के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करे। आयोग ने साफ कर दिया है कि बीमा कंपनियां तकनीकी आधार पर उपभोक्ताओं को उनके वाजिब हक से वंचित नहीं रख सकतीं। शिकायतकर्ता विमल साहू ने 2015 में वाहन खरीदा था, जिसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। जून 2016 में वाहन चोरी हो गया, जिसकी सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को दी गई थी।

सभी दस्तावेज और चाबियां जमा करने के बावजूद बीमा कंपनी ने दावे का निपटारा नहीं किया। उपभोक्ता को इस मामले में दो बार जिला आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। पहले मामले में 2019 में आदेश पारित हुआ था, जिसके बाद उपभोक्ता ने सभी दस्तावेज और चाबियां कंपनी को सौंप दीं।

इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दस्तावेज अपूर्ण होने का बहाना बनाकर भुगतान रोक दिया, जिससे बाद उपभोक्ता ने दोबारा शिकायत दर्ज कराई। बीमा कंपनी को 30 दिनों के भीतर 10 लाख रुपये (वाहन का आइडीवी) का भुगतान करना होगा। यदि भुगतान समय पर नहीं होता है तो सात प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देना होगा। मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देना पड़ेगा। उपभोक्ता को मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अलग से दिए जाएंगे।

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