Site icon

राजनांदगांव : निगम-मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा और योगेश दत्त मिश्रा का नाम अतिथि सूची से गायब 226 करोड़ के भूमिपूजन कार्यक्रम में जानबूझकर अनदेखी

01


राजनांदगांव , राजनांदगांव में 226 करोड़ 68 लाख रुपये के विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में हुई एक बड़ी चूक ने सियासी हलचल मचा दी है। इस कार्यक्रम में प्रदेश के दो महत्वपूर्ण निगम-मंडल अध्यक्ष, नीलू शर्मा (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल) और योगेश दत्त मिश्रा (अध्यक्ष, श्रम विभाग), का नाम अतिथि सूची से गायब हो गया, जिसके बाद से शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि यह चूक केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई अनदेखी हो सकती है।


नगर निगम द्वारा अतिथि सूची तैयार करने में सवालों की गुंजाइश

यह विवाद इस बात को लेकर उठ रहा है कि आखिरकार नगर निगम में किसने अतिथि सूची तैयार की और क्यों इन दोनों नेताओं का नाम जानबूझकर हटा दिया गया। 226 करोड़ रुपये के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रदेश स्तर के जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को अतिथि सूची से बाहर रखे जाने को लेकर राजनीतिक गलियारों में नाराजगी बढ़ रही है। यह सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े सरकारी कार्यक्रम में प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं को क्यों नजरअंदाज किया गया।


मधुसूदन यादव और संतोष पांडे के नाम की गायबगीर सियासी चर्चा का हिस्सा पूर्व मे भी रहा

इससे पहले, जब राजनांदगांव नगर निगम में एक बड़े कार्यक्रम के लिए अतिथि सूची तैयार की गई थी, तो महापौर मधुसूदन यादव का नाम भी इसमें शामिल नहीं था। इस पर भी राजनीतिक हलकों में जबरदस्त चर्चा हुई थी। वहीं, भाजपा के नेता और सांसद संतोष पांडे का नाम भी गायब कर दिया गया था, जिसके बाद यह चर्चा और भी तेज हो गई कि भाजपा में इस तरह से नाम गायब करना अब एक रणनीति बन गया है। चर्चा में आना हो तो नाम गायब कर दो, यह अब एक नए राजनीतिक खेल के रूप में उभर कर सामने आया है।


राजनीतिक गलियारों में गहरी नाराजगी, क्या होगा नगर निगम का स्पष्टीकरण?
सियासी हलकों में इसे लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं, और अब सबकी नजर इस बात पर है कि नगर निगम इस पूरे मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है। ऐसे कई घटनाक्रम हुए हैं जहां नगर निगम में महत्वपूर्ण नेताओं के नाम सूची से काटे गए हैं। अब नीलू शर्मा और योगेश दत्त मिश्रा का नाम गायब होना एक बड़ा सवाल बनकर उभरा है।


भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों का विरोध
इस मामले को लेकर भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों में भी नाराजगी देखी जा रही है। यह मामला अब सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह सब एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है?


निगम की भूमिका और स्पष्टीकरण का इंतजार
अब इस मुद्दे पर नगर निगम की भूमिका स्पष्ट करना बहुत जरूरी हो गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर निगम इस विवाद से कैसे निपटता है और क्या भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।
यह घटना राजनांदगांव के राजनीतिक वातावरण में एक नई बहस का मुद्दा बन गई है और सभी की नजरें निगम के अगले कदम पर हैं।

Exit mobile version