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सीएचसी में ऑक्सीजन वाले बेड, लेबर रूम को भी कर रहे अपडेट

सीएचसी में ऑक्सीजन वाले बेड, लेबर रूम को भी कर रहे अपडेट

महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में डेल्टा प्लस वैरिएंट का मामला सामने आया है। चूंकि राजनांदगांव जिला महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बॉर्डर से लगा हुआ है इस वजह से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इससे तीसरी लहर की आशंका और भी गहरा गई है। इसे देखते हुए जिले में भी तैयारी तेज कर दी गई है। ग्राउंड लेवल पर स्वास्थ्य सुविधा मजबूत करने के लिए जिले के हर सीएचसी में आक्सीजन वाले बेड तैयार किया जा रहा है। इसके लिए ऑक्सीजन की पाइपलाइन भी बिछ रही है।

वहीं सभी जगहों के लेबर रूम को भी अपडेट किया जा रहा है। ताकि संक्रमित गर्भवती महिलाओं का प्रसव लोकल लेवल में ही हो सके। इससे मेडिकल टीम पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। दूसरी लहर के दौरान जो कमियां सामने आई है, उसे दूर करने के लिए मेडिकल टीम युद्ध स्तर पर काम रही है। दावा है कि महीनेभर में लगभग सभी तैयारी पूरी कर ली जाएगी। इससे तीसरी लहर के दौरान लोगों को समय पर उचित उपचार मिल सकेगा। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सबसे अधिक समस्या ऑक्सीजन बेड को लेकर सामने आई थी। जिसे देखते हुए सबसे पहले ऑक्सीजन वाले बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है।

ब्लाक मुख्यालय में भी चाइल्ड आइसोलेशन वार्ड
ब्लाक मुख्यालय के पीएचसी में जहां आक्सीजन वाले बेड बढ़ाए जा रहे हैं, वहीं बच्चों के लिए स्पेशल आइसोलेशन वार्ड भी बनाया जा रहा है। ताकि संक्रमण की स्थिति को देखते हुए सामान्य हालत वाले बच्चों को ब्लाक मुख्यालय में ही इलाज दिया जा सके। इधर मेडिकल टीम को विशेष ट्रेनिंग देने की तैयार है। ये ट्रेनिंग विशेषकर बच्चों के इलाज को लेकर होगी।

मेडिकल कॉलेज में बच्चों का आईसीयू बन रहा
तीसरी लहर में अधिक खतरा बच्चों को लेकर बताया जा रहा है। इसे देखते हुए मेडिकल कॉलेज हास्पिटल में बच्चों के लिए विशेष आईसीयू भी तैयार किया जा रहा है। पेंड्री में 100 बेड का स्पेशल आईसीयू वार्ड की तैयारी तेजी से पूरी हो रही है। इसके लिए लगभग 22 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रबंधन का दावा है कि तीसरी लहर के संभावित समय के पहले ही इसका काम भी पूरा कर लेंगे।

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