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कॅरियर की शुरुआत में ही महामारी से हुआ सामना, वायरस ने इन्हें भी घेरा, अपनों से दूर रहे, मानसिक दबाव भी झेला पर हारे नहीं

कॅरियर की शुरुआत में ही महामारी से हुआ सामना, वायरस ने इन्हें भी घेरा, अपनों से दूर रहे, मानसिक दबाव भी झेला पर हारे नहीं

कोविड काल में लोगों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तो वो हैं डॉक्टर्स। इस संकट की घड़ी में इन्होंने अपनी परवाह नहीं की बल्कि अपनों से दूर रहकर लोगों की जिंदगी बचाने में जुटे रहे। इनमें से कई ऐसे डॉक्टर्स भी हैं, जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई कर महज कॅरियर की शुरुआत की थी और इन्हें कोविड जैसी महामारी का सामना करना पड़ गया। यह दौर इनके लिए चुनौती भरा रहा। हर कदम पर मुश्किलें रही हैं पर इन डॉक्टर्स के जज्बे को भास्कर सलाम करता है जो कि खुद को संक्रमण से घिरे पर हारे नहीं और हजारों मरीजों को स्वस्थ्य कर घर भेजा।

डॉक्टर्स का कहना है इस दौर में मानसिक रूप से खुद को स्ट्रांग रखना जरूरी है था, क्योंकि बार-बार ऐसे घटनाक्रम सामने आ रहे थे कि आंखें बोझल हो रही थीं। दूसरी लहर में लोगों के दर्द को करीब से देखा है। इसलिए इनका कहना है कि वैक्सीनेशन जरूर कराएं और परिवार को सुरक्षित रखें।

आंखें भर आती थीं, खुद को संभालते थे
मेडिकल अफसर डॉ. रूही अंजुम अंसारी ने बताया कि मेडिकल की पढ़ाई पास आउट करते ही इस फील्ड में कॅरियर की शुरुआत किए थे कि कोरोना की लहर आ गई। कोविड में ड्यूटी लगी। घबराए बिना ही ड्यूटी करने लगे, क्योंकि दूसरों को इस संकट से बचाना था। आईसीयू में एक के बाद एक मरीजों की मौत होता देखकर आंखें भर आती थीं पर खुद को संभालते थे। पीड़ा इस बात की होती थी कि प्रोटोकाॅल के चलते गंभीर मरीजों के पास भी उनके अपने नहीं हो पाते थे। पूरी टीम एक-एक मरीज को ठीक करने में जुटी रही पर दूसरी लहर घातक होने से कई मरीजों ने दम तोड़ा। डॉ.रूही स्वयं कोविड संक्रमित हुई थीं ठीक होकर फिर से ड्यूटी करने लगीं।

सेवा को दी पहली प्राथमिकता
डॉ. विकास जैन बताते हैं कि कोविड काल में परिवार के लाेग बेहद चिंता करते थे। कोविड में ड्यूटी लगने पर परिवार वालों का बार-बार कॉल आता था पर मरीजों की सेवा पहली प्राथमिकता थी। इसलिए कई बार बात भी नहीं करते थे। बताया कि तीन बार कोविड में ड्यूटी लगी। इसलिए लंबे समय तक परिवार से दूर रहे। ड्यूटी के बाद अगर घर जाना भी होता था तो परिजनों से दूरी बनाए रखते थे। यह पहल काफी संघर्ष भरा रहा। डॉ. जैन ने बताया सीमित संसाधनों के बाद भी मरीजों की रिकवरी अच्छी हुई है। बताया कि लंबे समय तक पीपीई किट पहनना भारी पड़ता था पर मरीजों की हालत देखकर अपनी परेशानी को भूल जाते थे।

सेवा के लिए इस क्षेत्र में आईं
डॉ. इति खत्री ने बताया कि कॅरियर की शुरुआत कर ही रहे थे कि कोविड-19 कोरोना संक्रमण की लहर आ गई। आनन-फानन में ड्यूटी लगी। पीपीई किट पहनना, लगातार मास्क लगाए रखना। एक तरह से चुनौती थी, क्योंकि ऐसा दौर पहले कभी देखा नहीं था। कॅरियर की शुरुआत में इस दौर का अनुभव हुआ। इति स्वयं कोविड संक्रमित हो चुकी हैं। इनकी सेवा भावना को देखते हुए सम्मानित भी किया गया था। इति का कहना है कि मरीजों की सेवा के लिए ही इस फिल्ड में आईं हैं, इसलिए कोविड में ड्यूटी लगने के बाद भी पीछे नहीं हटीं।

हालात गंभीर थे पर पीछे नहीं हटे
डॉ कुशलकांत ताम्रकार ने बताया कि मेडिकल की पढ़ाई पासआउट कर जॉब की शुरुआत किए ही थे कि महामारी आ गई। सीनियर्स के गाइड लाइन के अनुसार ड्यूटी करने लगे। दूसरी लहर में हालात ऐसे थे कि परिजन लौट आने कहते थे पर पीछे नहीं हटे, क्योंकि डॉक्टर्स की कमी थी। अगर पीछे हटते तो मरीजों को नहीं बचा पाते। पहले तो स्वयं को संभाला फिर हिम्मत बांधकर ड्यूटी करने। इस बीच संक्रमण की चपेट में आए पर अपनी परेशानी को पीछे रखते कोरोना को हराया और फिर ड्यूटी में लग गए।

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