Site icon

CG : 22 साल पहले रक्तदान से अदिती जैन की जान बची थी, आज खुद किया रक्तदान …

CG : 22 साल पहले रक्तदान से अदिती जैन की जान बची थी, आज खुद किया रक्तदान …

CG : 22 साल पहले रक्तदान से अदिती जैन की जान बची थी, आज खुद किया रक्तदान …

रायपुर। 22 साल पहले जब अदिती जैन की जान गंभीर रूप से खतरे में थी, तब उनकी जान रक्तदान से बची थी। अब 22 साल बाद अदिती ने समाज के लिए वही सेवा दी और स्वयं रक्तदान किया। इस दौरान उन्होंने लोगों को रक्तदान के महत्व और जरूरत के बारे में जागरूक किया। अदिती का यह कदम समाज में रक्तदान के प्रति सकारात्मक संदेश फैलाने वाला माना जा रहा है।

अदिती जैन ने जनता से रिश्ता को बताया कि जब 1 साल की थी तब ब्लड की जरूरत थी, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था, उस समय चाचा और दोस्तों ने रात 3 बजे खून देकर मुझे नया जीवन दिया। जब भी घर में उस बात की चर्चा होती है, तब तब मैं भावुक हो जाती हूँ, चाचा के त्वरित कदम से प्रभावित हूँ, मुझे बहुत कुछ सिख मिली है, महावीर जयंती के अवसर पर रक्तदान कर रही हूँ, आगे भी रक्तदान करने में पीछे नहीं हटूंगी।

रक्तदान मानव जीवन बचाने का सबसे सरल और महत्वपूर्ण तरीका है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में जैसे सड़क दुर्घटना, सर्जरी या गंभीर बीमारी में रक्त की जरूरत तुरंत पड़ती है।

नियमित रक्तदान करने वाले व्यक्ति न केवल दूसरों की जान बचाते हैं बल्कि अपने स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होते हैं। रक्तदान से शरीर में नया रक्त बनता है, जिससे हृदय और रक्त परिसंचरण बेहतर रहता है। इसके अलावा, रक्तदान करने से शरीर में लोहे का स्तर नियंत्रित रहता है और रक्त पतला रहता है, जो हृदय रोगों के खतरे को कम करता है।

Exit mobile version