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रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने हरी खाद और नील-हरित काई को बढ़ावा

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कोरिया,

कृषि लागत में कमी और मृदा स्वास्थ्य सुधारने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के निर्देशन में जिला कोरिया के उप संचालक कृषि कार्यालय में प्रशिक्षण- सह-समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा किसानों को जैविक विकल्पों के प्रति जागरूक करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने हरी खाद एवं नील-हरित काई के उपयोग के लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन प्राकृतिक उपायों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है, उत्पादन लागत कम होती है और मृदा की उर्वरता व स्थिरता बनी रहती है।

कार्यक्रम के दौरान उप संचालक कृषि कार्यालय परिसर में नील-हरित काई उत्पादन तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे अधिकारियों को व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। इसका उद्देश्य है कि वे ग्राम स्तर पर किसानों को प्रभावी ढंग से प्रशिक्षित कर सकें।
बैठक में बैकुण्ठपुर एवं सोनहत विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कृषि विभाग ने सिंचाई सुविधा वाले किसानों से अपील की है कि वे मानसून से पूर्व, धान रोपाई के 40-45 दिन पहले सनई एवं ढेंचा जैसी हरी खाद फसलों की बुवाई करें। साथ ही, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को गांवों में चौपाल आयोजित कर संतुलित उर्वरक उपयोग का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।

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