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ऑनलाइन सट्टे की लत ने बनाया चोर: बिलासपुर में एसी मिस्त्री ने गहने गिरवी रख उड़ाए पैसे, पुलिस ने पकड़ा

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 बिलासपुर

सूने मकानों में सिलसिलेवार चोरी करने वाले शातिर एसी मिस्त्री को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एसीसीयू और सिविल लाइन पुलिस तीन सौ से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगालकर उस तक पहुंची है। आरोपित सट्टे की लत के कारण अपराध की राह पर चला था।

एसएसपी रजनेश सिंह ने सिलसिलेवार चोरी का पर्दाफाश करते हुए बताया कि आरोपित सूरज काछी मंगला क्षेत्र में किराए के मकान में रहकर एसी रिपेयरिंग के बहाने घरों की रेकी करता था। वह सुने मकानों को चिन्हित कर टोपी और मास्क पहनकर चोरी की वारदात को अंजाम देता था।

आरोपित ने शहर में कुल आठ चोरियां करना स्वीकार किया है। चोरी को अंजाम देने बाद आरोपित गहनों को गोल्ड लोन कम्पनी में गिरवी रख रुपये ले लिया करता था।

खाते में रकम आने पर वह परी मैच ऐप पर करीब 30 लाख रुपये की बड़ी रकम हार चुका था। पुलिस ने आरोपित से 252 ग्राम सोना, चांदी और चोरी की रकम से खरीदे गए घरेलू सामान सहित 45.84 लाख का माल बरामद किया है।
एसी रिपेयरिंग के दौरान करता था सूने मकान की रेकी

आरोपित पेशे से एसी मिस्त्री था, जिसका फायदा उठाकर वह पाश कॉलोनियों में सर्विसिंग के बहाने घुसता था। इस दौरान वह उन मकानों की सूची तैयार करता था जहां ताला लगा होता था। वह वारदात से पहले भागने के रास्तों और सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का पूरा अवलोकन कर लेता था, ताकि पकड़ा न जा सके।
इन आठ बड़ी चोरियों का हुआ पर्दाफाश (सामान राशि के साथ)

ऑनलाइन सट्टा ऐप में बेटिंग करने के लालच में बना चोर

सूरज काछी को परी मैच एप में ऑनलाइन सट्टा ऐप की लत लग गई थी। ऐप पर बेटिंग के दौरान वह करीब 30 लाख रुपये हार गया, जिसकी भरपाई के लिए उसने चोरी का रास्ता चुना। वह चोरी के सामान से मिलने वाली रकम को वापस सट्टे में लगाकर हार को जीत में बदलने का प्रयास करता था।
पुरानी क्राइम ब्रांच निष्क्रिय, नई टीम को सफलता

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि पुरानी क्राइम ब्रांच निष्क्रिय हो चुकी थी। नई एसीसीयू का गठन किया गया है। इस नई टीम की तकनीकी दक्षता और सक्रियता के कारण ही शहर में हो रही सिलसिलेवार चोरियों पर अंकुश लगा है और आरोपित पकड़ा गया है।
पुलिस को चकमा देने कपड़ो का उपयोग

आरोपित सूरज कांछी काफी शातिर चोर है। वह पुलिस व लोगों को धोखा देने के लिए बैग में दो से तीन कपड़े साथ लेकर चलता था। चोरी की वारदात को अंजाम देने बाद वह अपने कपड़े वही बदल लिया करता था, ताकि पुलिस को सीसीटीवी कैमरे की जांच के दौरान एक कपड़े में दिखाई न देने पर शंका न हो। वहीं फोन पर बात करने का दिखावा करता था लेकिन काल नहीं करता, जिससे डम्प लोकेशन से उसे ट्रैस न किया जा सके।

    आरोपित सट्टे की लत को पूरा करने के लिए चोरी करता था। एसी रिपेयरिंग के लिए जाने के दौरान वह सूने मकानों की रेकी किया करता और फिर रात में जाकर उन मकानों का ताला तोड़कर वारदात को अंजाम दिया करता था।

    रजनेश सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर

 

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