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हड़ताल… 113 सोसाइटियों में लटका ताला इधर खाद-बीज के लिए भटक रहे किसान

हड़ताल… 113 सोसाइटियों में लटका ताला इधर खाद-बीज के लिए भटक रहे किसान

सेवा सहकारी समितियों के प्रबंधक और कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। इस वजह से जिले में संचालित 113 समितियों में ताला लटकने से खाद, बीज, ऋण वितरण प्रभावित हो रहा। किसानों को समितियों से मायूस लौटना पड़ रहा है। हड़ताल के चलते गोबर खरीदी, फसल बीमा का काम भी ठप हो गया है। किसानों को बीमा कराने के लिए भटकना पड़ रहा है। सहकारी समितियों की ओर से संचालित 300 राशन दुकानें भी बंद है। हितग्राही खाद्यान्न के लिए भटक रहे हैं।

सहकारी कर्मचारी 27 जुलाई को विधानसभा का घेराव भी करने वाले हैं। वहीं ब्लॉक और ब्रांच स्तर पर समितियों के सामने धरना भी देंगे। खेती के सीजन में सहकारी कर्मचारियों के हड़ताल में जाने से प्रशासन की नींद उड़ गई है क्योंकि जिलेभर में खाद की डिमांड जारी है। किसानों को फसल बीमा कराने के लिए 30 जुलाई तक का समय दिया गया है। सेवा सहकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रूपनारायण हिरवानी ने बताया कि प्रमुख रूप से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। शासन तक समस्याओं को भी रख चुके हैं।

गोबर की खरीदी भी ठप
किसान सोसाइटियों में बीमा कराने के लिए पहुंच रहे हैं पर समितियों में ताला लटक रहा है। खाद भी नहीं ले पा रहे हैं। खेती के लिए किसानों को नकद राशि चाहिए पर हड़ताल की वजह से यह भी नहीं मिल पा रही। राज्य सरकार की महत्वपूर्ण गोधन न्याय योजना भी ठप हो गई है। पशुपालक गोबर नहीं बेच पा रहे हैं। पशुपालकों का भुगतान भी अटक गया है। ठीक खेती किसानी के समय किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है।

दे चुके थे चेतावनी
सहकारी कर्मचारियों ने बताया कि शासन-प्रशासन से पूर्व में भी नियमितीकरण की मांग रखकर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं पर कोई राहत नहीं दी जा रही है। कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं पर मांग पूरी नहीं कराई जा रही है। बताया कि धान की खरीदी के बाद उठाव छह माह से पूरा नहीं हुआ है। खरीदी केन्द्रों में धान बेकार पड़ा हुआ है। इसका नुकसान भी समितियों को भरना होगा। इस तरह समितियां घाटे में जा रहीं हैं।

चावल का वितरण बंद
सहकारी समिति के माध्यम से जिले में 300 राशन दुकानें भी संचालित की जा रही हैं। हड़ताल के चलते राशन दुकानों में भी ताला लटक रहा है। हितग्राहियों को राशन लेने भटकना पड़ रहा। प्रशासन की ओर से सामग्री वितरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। इसके चलते हितग्राही परेशान हो रहे हैं। विशेषकर किसानों की समस्या बढ़ गई है। खाद नहीं मिलने से खेती कार्य प्रभावित होगा।

धान खराब होने के कारण नुकसान भी झेलते हैं कर्मी
बताया कि समितियों के कर्मचारियों को 24 घंटे उपज की निगरानी करनी पड़ती है। खरीदी के बाद खुले में रखा धान खराब होने पर नुकसान भी झेलते हैं। सरकार के महत्वपूर्ण कार्यों को क्रियान्वयन करने के बाद नियमित नहीं किया जा रहा है। अध्यक्ष हिरवानी ने बताया कि 27 को विधानसभा का घेराव करेंगे। वहीं इसके बाद ब्लॉक और ब्रांच स्तर पर धरना शुरू कर देंगे। इस संबंध में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सीईओ सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

चाहिए 15 हजार टन खाद आपूर्ति 700 टन की ही
जिले में वर्तमान में 15 हजार टन यूरिया और डीएपी की जरूरत है पर शनिवार को केवल 700 टन खाद की आपूर्ति हुई है। इस वजह से खाद का संकट बना हुआ है। दूसरी ओर से सहकारी समितियों में हड़ताल होने से किसानों को जरूरत के वक्त खाद नहीं मिल पा रहा है।

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