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CG : धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का और मिलेट्स की खेती करने वाले किसानों को मिलेगी 15 हजार प्रति एकड़ आदान सहायता …

CG : धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का और मिलेट्स की खेती करने वाले किसानों को मिलेगी 15 हजार प्रति एकड़ आदान सहायता …

एमसीबी । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों की आय में वृद्धि, कृषि लागत में कमी तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना के नवीन स्वरूप को मंजूरी प्रदान की है। योजना के तहत अब खरीफ सीजन में धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें अपनाने वाले किसानों को 15,000 रुपए प्रति एकड़ की आदान सहायता (इनपुट प्रोत्साहन राशि) प्रदान की जाएगी।

उप संचालक कृषि, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ने बताया कि राज्य सरकार का यह निर्णय कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों को कम पानी में अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं भूजल संरक्षण, भूमि की उर्वरा शक्ति में सुधार तथा कृषि की स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि योजना का लाभ उन किसानों को मिलेगा जो अपने पंजीकृत रकबे में धान की खेती के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का अथवा मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसी वैकल्पिक फसलों का चयन करेंगे। योजना में अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, मक्का, कपास तथा कोडो, कुटकी और रागी जैसी फसलें शामिल की गई हैं।

पूर्व से वैकल्पिक फसलें लेने वाले किसानों को भी मिलेगा लाभ :

उप संचालक कृषि ने बताया कि जो किसान पूर्व वर्षों से खरीफ मौसम में दलहन, तिलहन, मक्का, कोडो, कुटकी, रागी अथवा कपास की खेती कर रहे हैं, उन्हें भी निर्धारित शर्तों के अनुसार लाभ मिलेगा। ऐसे किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबे की पुष्टि के बाद पूर्व निर्धारित दर से 10,000 रुपए प्रति एकड़ की आदान सहायता प्रदान की जाएगी।

पंजीकरण कराना होगा अनिवार्य :

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित समयावधि के भीतर एकीकृत किसान पोर्टल पर अपनी भूमि एवं प्रस्तावित फसल का ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। केवल वे किसान पात्र होंगे जिन्होंने पिछले खरीफ सीजन में धान की खेती की थी और आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य स्वीकृत फसल लेने के लिए पंजीकरण कराया हो।

इन संस्थाओं को नहीं मिलेगा लाभ :

योजना के तहत ट्रस्ट, मंडल, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, शाला विकास समितियां, केंद्र एवं राज्य शासन की संस्थाएं तथा महाविद्यालय जैसे विधिक व्यक्तियों को पात्रता के दायरे से बाहर रखा गया है।

डिजिटल सर्वे और सत्यापन से सुनिश्चित होगी पारदर्शिता :

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल फसल सर्वेक्षण, एग्रीस्टेक प्लेटफॉर्म, राजस्व एवं कृषि विभाग द्वारा सैटेलाइट आधारित निगरानी तथा गिरदावरी (भौतिक सत्यापन) की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसान ने वास्तव में धान के स्थान पर स्वीकृत वैकल्पिक फसल की ही खेती की है।

डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में पहुंचेगी राशि :

योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को मिलने वाली सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाएगी। इससे किसान गुणवत्तायुक्त बीज, उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि आदानों की समय पर खरीद कर सकेंगे और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे। उप संचालक कृषि ने जिले के सभी पात्र किसानों से अपील की है कि वे समय पर एकीकृत किसान पोर्टल पर अपना पंजीयन कराएं तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि धान के विकल्प के रूप में कम पानी वाली एवं अधिक लाभकारी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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