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CG : बेमेतरा जिले में खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध…

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किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने प्रशासन सतर्क, गुणवत्ता नियंत्रण के लिए लगातार कार्रवाई जारी

बेमेतरा । खरीफ मौसम में किसानों को समय पर एवं पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। जिले में शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप खाद का भंडारण एवं वितरण निरंतर किया जा रहा है। साथ ही खाद की गुणवत्ता एवं कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उड़नदस्ता दल लगातार निरीक्षण एवं कार्रवाई कर रहे हैं।

शासन द्वारा बेमेतरा जिले के लिए वर्ष 2026-27 खरीफ सीजन हेतु कुल 68,300 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक जिले में 66,560 मीट्रिक टन खाद प्राप्त हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के कुल खाद वितरण का 103 प्रतिशत है। इनमें से 45,953 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो कुल उपलब्ध खाद का लगभग 67 प्रतिशत है।

जिले में डीएपी (DAP) का लक्ष्य 16,200 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 6,699 मीट्रिक टन डीएपी** समितियों में उपलब्ध कराया जा चुका है। यह पिछले वर्ष के कुल डीएपी वितरण का लगभग 60 प्रतिशत है।

डीएपी के विकल्प के रूप में जिले में 11,698 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) तथा 7,725 मीट्रिक टन एनपीके (NPK) खाद भी उपलब्ध कराई गई है। जिले को लक्ष्य के विरुद्ध 212 प्रतिशत सिंगल सुपर फास्फेट, 110 प्रतिशत यूरिया तथा 77 प्रतिशत एनपीके खाद प्राप्त हो चुकी है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल डीएपी पर निर्भर न रहें। सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) में 16 प्रतिशत फास्फोरस एवं 11 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है, जो फसलों की बेहतर वृद्धि एवं उत्पादन के लिए उपयोगी पोषक तत्व हैं। इसलिए किसान भाई डीएपी के स्थान पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार सिंगल सुपर फास्फेट अथवा एनपीके उर्वरकों का भी उपयोग कर सकते हैं।

इधर, खाद की गुणवत्ता बनाए रखने एवं अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उड़नदस्ता दलों द्वारा लगातार निरीक्षण एवं जांच अभियान चलाया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान अब तक 3 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। 3 प्रकरणों में 953 बोरी खाद जब्त की गई है तथा 4 प्रकरणों में खाद के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा निर्धारित मानकों के विपरीत खाद विक्रय पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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