राजनांदगांव l जिला अस्पताल के एसएनसीयू में चल रहे विवाद मामले में जांच टीम के अफसरों ने दोनों पक्षों का बयान ले लिया है। जांच पर स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने असंतोष जाहिर करते हुए जांच टीम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए थे। वहीं अब दोनों पक्षों का बयान लेने के बाद रिपोर्ट का इंतजार है। जांच टीम के अफसरों द्वारा रिपोर्ट सौंपने में देरी की जा रही है। डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों के बीच खींचतान की वजह से जांच, इलाज और दूसरे प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहें है।
एसएनसीयू के प्रभारी डॉक्टर विक्रम बैद पर वहीं ड्यूटी करने वाली स्टाफ नर्सेज ने मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था। सिविल सर्जन से इसकी शिकायत की थी। इसके बाद विक्रम बैद ने भी सिविल सर्जन को एसएनसीयू में स्टाफ ज्यादा होने से लेकर अन्य बिन्दुओं पर एक पत्र सौंपा था। मामले की जांच करने अफसरों की टीम बनी। जिसमें पूर्व सीएमएचओ डॉ. बंसोड, डॉ. संदीप ताम्रमार, डॉ. अल्पना लूनिया को जांच अधिकारी बनाया। उन्होंने दोनों पक्षों के साथ सिविल सर्जन का बयान लिया है। लेकिन रिपोर्ट नहीं सौंपी है। जांच अफसरों ने सीसीटीवी फुटेज देखने के साथ अन्य बिन्दुओं पर जांच करने की जानकारी दी है।
निजी अस्पतालों में सेवा नहीं दे पाएंगे डॉक्टर्स जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टर्स प्रशासनिक कामकाज और न्यायालय में पेशी का बहाना बना कर निजी अस्पतालों में सेवा दे रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। अस्पताल प्रबंधन कसावट लाने की तैयारी में है। डॉक्टरों को पेशी की तारीख और समय की दस्तावेजी जानकारी देनी होगी। इससे गायनिक, सर्जरी और अन्य विभागों के काम प्रभावित होते है। सोनोग्राफी कराने गर्भवतियों की वेटिंग बढ़ती जाती है। ऐसे में उन्हें तारीखें देनी पड़ती है। ओपीडी टाइमिंग में आने-जाने की निगरानी होगी। दवा बेचने के लिए ओपीडी टाइमिंग में डॉक्टरों से मिलने आने वाले दवा कंपनी के एमआर की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।

