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राजनांदगांव : रोड किनारे की पट्टी को अब सफेद करने में लगा ठेकेदार, खामियां हैं, नहीं हुई कार्रवाई…

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डोंगरगांव , बगदई पुल से चौकी रोड गांधी पेट्रोल पंप तक 18 करोड़ से निर्माणाधीन सड़क प्रारंभ से ही विवादित रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाले इस सड़क में अनेक खामियां हैं, जिसे समय-समय पर समाचारों पत्रों के माध्यम से शासन-प्रशासन के संज्ञान में लाया गया है।

बावजूद इसके जनता के पैसों को बर्बाद करने वाले ठेकेदार के काम में न तो सुधार आया और न सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता आई, अब तक सड़क निर्माण ठेकेदार के ऊपर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई, जिससे अन्य गलती करने वाले को सबक मिल सके और न ही इस ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया गया है।

आम जनता की आशाओं के दमनकारी ठेकेदार को बार-बार अभयदान दिया जा रहा है। वर्तमान में ठेकेदार द्वारा रोड के किनारे सफेद लाइन की मार्किंग की जा रही थी, इस पर नगर के कुछ जागरूक नागरिकों ने मीडिया से इसकी शिकायत की। सच्चाई जानने मौके पर पहुंचने पर देखा व पाया कि रोड निर्माण करने वाले ठेकेदार लेखराम साहू के द्वारा गंदे और आधे-अधूरे रोड में डिवाइडर के दोनों ओर जल्द काम पूर्ण करने के चक्कर में सड़क में मार्किंग कराया जा रहा है।

मौके पर मजदूरों द्वारा धूल मिट्टी को अच्छे से साफ किए बगैर मार्किंग किया जा रहा था। इस सबंध में जब सवाल जवाब किया गया, तो वर्करों ने बताया कि ठेकेदार ने जैसे काम करने बोला है, वैसा कर रहे हैं। इधर इस बात की शिकायत विभाग के कार्यपालन अभियंता एस के चौरसिया तक पहुंची, तो उन्होंने काम बंद कराने अपने कर्मचारियों को आदेशित किया।

नियम ताक पर, आड़े तिरछे, गुणवत्ताहीन मार्किंग की मौके पर काम बंद कराने विभाग के कर्मचारी पहुंचे और काम बंद करने की बात बोलकर वापस चले गए. इधर उनके जाते ही काम फिर चालू कर दिया गया। वहीं जब पूछा गया कि इतना पतला लेयर क्यों डाल रहे है, तो कहा कि जैसा बोले हैं वैसा काम कर रहे हैं। वहीं इस आड़े तिरछे और गुणवत्ताहीन मार्किंग की चौड़ाई भी नियमानुसार नहीं है। मौके देखने से स्पष्ट है कि बेहद घटिया तरीके से काम को अंजाम दे रहे हैं।

लंबे समय से चल रहे सड़क निर्माण कार्य लगभग साढ़े तीन किमी की सड़क को ठेकेदार ने बर्बाद कर दिया और आम जनता के पैसों से बन रहे सड़क में गुणवत्ता के नाम पर कुछ नहीं है। पीडब्लूडी विभाग के अधिकारियों की लापरवाही भी इस कदर रही कि वे सही को सही और गलत को गलत नहीं बोल पा रहे हैं और ठेकेदार की मनमानी में सहभागी बने हुए हैं। वर्तमान में सड़क में अनेक जगहों पर दबाव अलग नजर आ रहा है जिससे कोई भी इसे नई सड़क नहीं कहेगा। खास बात यह है कि नई सड़क बाकायदा चमचमाती हुई सुसज्जित दिखती है लेकिन इस 18 करोड़ की लागत से सड़क को देखकर ऐसा लगता है कि घटिया मटेरियल के साथ केवल लीपापोती किया गया है।

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन अभियंता एसके चौरसिया कहा कि सड़क निर्माण कार्य में गलत काम हुआ है, उसे सुधारने के लिए ठेकेदार को आदेशित कर दिया गया है। जब तक काम सही नहीं होगा कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

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