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CG : हॉफ नदी पुनरुद्धार अभियान को मिला जनसहभागिता का मजबूत आधार…

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चक भ्रमण प्रशिक्षण के माध्यम से नदी संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दी गई जानकारी

बेमेतरा । कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशन में जिला प्रशासन बेमेतरा द्वारा विकसित भारत जन अभियान के अंतर्गत संचालित हॉफ नदी पुनरुद्धार अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से प्रभावी बनाने की दिशा में शनिवार को जनपद पंचायत नवागढ़ के ग्राम पंचायत अंधियारखोर में “चक भ्रमण (Transect Walk) प्रशिक्षण कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रदान (PRADAN) संस्था के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें नदी पुनरुद्धार, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हॉफ नदी के पुनर्जीवन के लिए ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों, मैदानी अमले एवं ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना, नदी तंत्र का वैज्ञानिक अध्ययन करना तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बेमेतरा ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हॉफ नदी का पुनरुद्धार केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनसहयोग और सामुदायिक सहभागिता से संचालित एक जनआंदोलन है। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों से जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जन अभियान का स्वरूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक ग्राम अपने स्थानीय जल स्रोतों एवं नदी तंत्र के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान रायपुर से आए प्रदान (PRADAN) संस्था के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को चक भ्रमण (Transect Walk) की अवधारणा, उसके उद्देश्य एवं व्यवहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण में नदी एवं जल स्रोतों का मानचित्रण, जलग्रहण क्षेत्र का अध्ययन, प्राकृतिक संसाधनों का आकलन, भूमि उपयोग की स्थिति, वनस्पति, जल प्रवाह, मिट्टी की गुणवत्ता तथा स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को सरल एवं व्यवहारिक तरीके से समझाया गया।

प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रतिभागियों ने हॉफ नदी के तट पर व्यावहारिक चक भ्रमण किया। इस दौरान नदी के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन कर जल प्रवाह, कटाव, अवरोध, भू-आकृति, वनस्पति एवं स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रकार के मैदानी अध्ययन से नदी पुनरुद्धार की वास्तविक आवश्यकताओं की पहचान कर प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा सकती है।

कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण अभियान भी चलाया गया। नदी किनारे पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण, भू-जल संवर्धन तथा जलवायु संतुलन का संदेश दिया गया। उपस्थित सभी लोगों ने पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में हॉफ नदी बेसिन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएँ, जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन तथा संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए अपने-अपने ग्रामों में जल संरक्षण एवं नदी पुनरुद्धार गतिविधियों को जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन “नदी बचेगी – प्रकृति सजेगी, जल समृद्धि – जीवन समृद्धि” के प्रेरक संदेश के साथ हुआ। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों से अपील की गई कि वे अपने गांवों में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण एवं नदी संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित कर हॉफ नदी पुनरुद्धार अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करें।

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