राजनांदगांव , जिले में कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जिला प्रशासन के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और पोट्ठ लईका अभियान के संयुक्त प्रयासों से जिले के 299 आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह कुपोषण मुक्त हो गए हैं। वहीं 1184 आंगनबाड़ी केंद्रों में अब एक भी गंभीर कुपोषित या गंभीर कम वजन वाला बच्चा नहीं है।
कलेक्टर जितेंद्र यादव के मार्गदर्शन में मिशन मोड में चलाए गए अभियान के तहत गर्भवती एवं शिशुवती माताओं की नियमित काउंसलिंग, बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग, घर-घर फॉलोअप और पोषण संबंधी जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से टेक होम राशन का वितरण, स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण तथा एनआरएलएम की समूह दीदियों द्वारा पोषण आहार तैयार करने और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।
सामान्य श्रेणी में लाने के लिए बनाई गई रणनीति जिले में वर्तमान में 1514 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। प्रशासन ने अब मध्यम कुपोषण से ग्रसित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। लक्ष्य के अनुसार 15 अगस्त 2026 तक 350 और तथा 2 अक्टूबर 2026 तक 551 अतिरिक्त आंगनबाड़ी केंद्रों को पूर्णतः कुपोषण मुक्त बनाने की योजना है। जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को कुपोषण मुक्त बनाना और प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ एवं सुपोषित भविष्य उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी को जागरूक भी किया जा रहा है।

