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Vehicle Checking पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस नहीं छीन सकती वाहन की चाबी; एसपी को दिए निर्देश

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जबलपुर

वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस और एक अधिवक्ता के बीच हुए विवाद के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए पुलिस और वकीलों दोनों को कानून के प्रति जिम्मेदारी निभाने की नसीहत दी है। 

वाहन चेकिंग के दौरान हुआ था विवाद
याचिका के अनुसार 11 जुलाई 2026 को ट्रैफिक चेकिंग अभियान के दौरान अधिवक्ता को रोका गया। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की, गाली-गलौज की, मारपीट की और आपराधिक धमकी दी। घटना के बाद नाराज वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने एसपी सम्पत उपाध्याय से मुलाकात कर शिकायत सौंपी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित अधिवक्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

राज्य सरकार ने रखा अपना पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अधिवक्ता दो अन्य लोगों के साथ एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे। तीन सवारी और बिना हेलमेट यात्रा करना मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन था। चालान की कार्रवाई के दौरान ही विवाद की स्थिति बनी।

शिकायत एसपी के पास लंबित
कोर्ट को बताया गया कि 13 जुलाई 2026 को की गई शिकायत अभी भी जबलपुर एसपी के पास विचाराधीन है और मामले की जांच शुरू हो चुकी है।

हाईकोर्ट की दोनों पक्षों को नसीहत
जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि बार के सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे विधि के शासन और वैधानिक व्यवस्था का सर्वोच्च सम्मान करें। कानून की रक्षा करने वालों को स्वयं भी उसका पालन करना चाहिए, क्योंकि कानून की गरिमा शब्दों से नहीं बल्कि आचरण से बनी रहती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों का दायित्व है कि वे कानून लागू करते समय धैर्य, शिष्टाचार और संयम बनाए रखें। वाहन चेकिंग के दौरान अनावश्यक कहासुनी, अभद्र भाषा का प्रयोग या वाहन की चाबियां छीनने जैसी शिकायतें अक्सर सामने आती हैं, जो उचित नहीं हैं।

एसपी को दिए कार्रवाई के निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायत उसकी शिकायत पर कार्रवाई न होने से संबंधित है। चूंकि मामला सक्षम पुलिस अधिकारी के समक्ष लंबित है और जांच जारी है, इसलिए कोर्ट ने जबलपुर एसपी को कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

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