राजनांदगांव , ज्ञान बल्लभ उपाश्रय भवन में चातुर्मासिक नियमित प्रवचन में शनिवार को मुनि श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि मन में स्वीकारने की क्षमता हो तो हम आगे बढ़ पाएंगे अन्यथा हमें परेशान होना पड़ेगा। हम हमेशा आगे बढ़ना चाहते हैं और कोशिश भी करते हैं किंतु लेट उठने के कारण हम सफल नहीं हो पाते। मुनि ने कहा कि जिस दिन हम यह स्वीकार लेंगे कि मैं लेट उठता हूं जिसकी वजह से मेरा काम नहीं हो पाता, सुबह अपने आप ही जल्दी उठने लगेंगे और आपका काम भी सफल होगा।
उन्होंने कहा कि आप किसी भी काम को मन से स्वीकारों तो आपमें स्वयं ही परिवर्तन आ जाएगा। कहा कि किसी भी चीज को मन से स्वीकारने के बाद उसे करने से वह काम अवश्य सफल होता है। मुनि जी ने कहा कि पॉजिटिव- नेगेटिव कुछ नहीं होता, यह केवल मन की सोच का परिणाम है। कहा कि जो घटना मेरे लिए पॉजिटिव है, वह सामने वाले के लिए नेगेटिव भी हो सकती है। देखना यह है कि हम उसे किस रूप में स्वीकार करते हैं। कहा कि जिसने हमें आगे बढ़ाया वह हमारे लिए अच्छा है और जिसने हमें पीछे धकेला वह हमारे लिए बुरा है, किंतु स्वीकार तो हमें दोनों को ही करना है। जब तक हम स्वीकार नहीं करेंगे तब तक आगे नहीं बढ़ पाएंगे और ना खुश रह पाएंगे।

