राजनांदगांव दस राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी हड़ताल के निर्णय को समर्थन देने श्रमिकों कर्मचारी और किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, सीटू, एक्टू, जिला किसान संघ सहित बैंक, बीमा और पोस्ट ऑफिस से जुड़े कर्मचारी-मजदूर सुबह 10 बजे कलेक्ट्रेट के सामने जुटे।
दोपहर 12 बजे आम सभा शुरू हुई। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की श्रम, किसान और निजीकरण संबंधी नीतियों का विरोध कर न्यूनतम वेतन बढ़ाने समेत कई मांगों पर आवाज बुलंद की। वक्ताओं ने कहा महंगाई लगातार बढ़ रही। लेकिन मजदूरों की आय उस अनुपात में नहीं बढ़ रही। मेहनतकश परिवारों को जीवनयापन मुश्किल हो रहा है।
पहले से लागू श्रमिक हितैषी कानूनों को खत्म कर चार श्रम कोड लागू की गई है। जिनका विरोध कर रहे हैं। सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण, शिक्षा का व्यवसायी करण और देश के संसाधनों के निजी हाथों में जाने पर आपत्ति जताई। सभा का संचालन तुलसी देवदास और पुनाराम साहू ने किया। वक्ताओं में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा अध्यक्ष भीमराव बागड़े, सीटू के छत्तीसगढ़ प्रभारी गजेंद्र झा, एक्टू के राष्ट्रीय सचिव बृजेन्द्र तिवारी, सुशांत कुमार, अधिवक्ता वीरेंद्र उके, एजी कुरैशी, अरुणा वैष्णव, पुष्पा ताम्रकार, रत्ना साहू, शैलेंद्री कोसरे, ईश्वरी साहू, ममता देशलहरे सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी चाहिए किसानों के मुद्दे को लेकर वक्ताओं ने विभिन्न कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने की मांग की। उनका कहना है किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से आर्थिक संकट बढ़ रहा है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और रसोईया कर्मचारियों को कर्मचारी का दर्जा देने, मानदेय के बजाय न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्टर के प्रतिनिधि को सौंपा गया।

