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राजनांदगांव : सच बोलिए, मर्यादित भाषा में वाणी पर नियंत्रण जरूरी…

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राजनांदगांव| ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित प्रवचन के दौरान खत्तर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के शिष्य मुनि श्रेयांशप्रभ सागर जी ने सोमवार को कहा कि लोग बोलते हैं कि सच कड़वा होता है किंतु सच कड़वा नहीं होता बल्कि हमारी भाषा ही कड़वी होती है। हमें सच बोलना चाहिए किंतु मर्यादित भाषा में ताकि किसी को दुख न पहुंचे। कहा कि सच बोलो तो काफी अच्छा है किंतु जहां झूठ बोलने की नौबत आती है, वहां मौन रहना ही बेहतर है। कहा कि हमें हमेशा सच ही बोलना चाहिए। हम दिन भर में पता नहीं कितना झूठ बोलते हैं।

वासुदेव राजा का उदाहरण देते हुए कहा कि एक झूठ ने उन्हें सातवें नरक में पहुंचा दिया तो पता नहीं हम कितना झूठ बोलते हैं। दस में से एक झूठ ही हम मजबूरी में बोलते हैं, शेष हम अपनी इच्छा से बोलते हैं। कहा कि झूठ बोलने से बचो। हमेशा सच बोलो। कहा कि भले ही सच कड़वा लगे लेकिन सच बोलने वाले पर लोगों का भरोसा बढ़ता है।

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