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राजनांदगांव : बाबा की पालकी यात्रा में शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह…

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राजनांदगांव , सावन के प्रथम प्रदोष और दूसरे सोमवार को बाबा चंद्रमौलेश्वर महाकाल की पालकी यात्रा धूमधाम से निकाली गई। भस्म रमाए अघोरियों का नृत्य, ढोल-नगाड़ों की गूंज और हर-हर महादेव जय चंद्रमौलेश्वर महाकाल का जयघोष के बीच अलौकिक और भक्तिमय नजारा दिखाई दिया। महाकाल सेना के तत्वावधान में निकली बाबा महाकाल की पालकी यात्रा में अघोरियों का नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यात्रा के साथ शिवभक्त आगे बढ़े, शहर के प्रमुख मार्ग देर तक शिवभक्ति के रंग में रंगे रहे।

पालकी यात्रा का शुभारंभ बसंतपुर क्लब चौक से किया गया। बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना और अगवानी के बाद पालकी नगर भ्रमण के लिए निकली। भगवान शिव के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा, पूजन और स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों और भक्ति संगीत की धुन पर शिवभक्त थिरकते रहे, वहीं अघोरियों की अनूठी वेशभूषा और नृत्य को देखने लोगों की विशेष भीड़ जुटी। सावन के हर सोमवार और अन्य दिनों में बाबा महाकाल की पालकी यात्रा शहर में निकाली जाएगी।

आयोजकों ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी को सनातन परंपरा, धार्मिक संस्कृति और राष्ट्रप्रेम से जोड़ने का संदेश भी दिया। सावन के पावन माह में आयोजित इस यात्रा ने शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। आयोजन में हेमा देशमुख, खूबचंद पारख, पवन मेश्राम, , बिट्टू गुप्ता, पूर्णिमा साहू, देवशरण सेन, अवतराम तेजवानी, मंसाराम मोटवानी, विनोद सिंह, गगन गुप्ता और प्रशांत गुप्ता सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

यात्रा में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा, विधायक प्रतिनिधि संतोष अग्रवाल, भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, मंडल अध्यक्ष प्रशांत गुप्ता, समाजसेवी पवन डागा, राकेश यादव सहित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने बाबा महाकाल की अगवानी की। इस दौरान पार्षद शेखर साहू, भरत साहू, चिंटू बग्गा, अवतराम तेजवानी, राजा मखीजा, संजय तेजवानी, अनिल तेजवानी, विनोद लूल्ला सहित बड़ी संख्या में सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से लोग शामिल हुए।

अघोरियों का प्रदर्शन देख यात्रा से जुड़ते गए श्रद्धालु भस्म और पारंपरिक अघोरी वेशभूषा में शामिल कलाकारों का नृत्य पालकी यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। ढोल-नगाड़ों की थाप पर अघोरी शिवभक्ति में लीन होकर नृत्य करते नजर आए। यात्रा के मार्ग में लोग रुककर इस अद्भुत प्रस्तुति को देखते रहे। अघोरियों के नृत्य और बाबा महाकाल की दिव्य पालकी ने यात्रा को अलग ही धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्वरूप दिया। पालकी यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, सनातन संस्कृति, सामाजिक सद्भाव, एकता और राष्ट्रप्रेम का संदेश देना भी है।

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