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राजनांदगांव : एमएमसी जोन के 80 से अधिक अतिसंवेदनशील गांवों में पहली बार बेखौफ मनेगा आजादी का पर्व …

राजनांदगांव : एमएमसी जोन के 80 से अधिक अतिसंवेदनशील गांवों में पहली बार बेखौफ मनेगा आजादी का पर्व …

राजनांदगांव : एमएमसी जोन के 80 से अधिक अतिसंवेदनशील गांवों में पहली बार बेखौफ मनेगा आजादी का पर्व …

करीब 40 साल तक जिस इलाके में स्‍वराज को चुनौती मिलती रही अब उन नक्‍सल प्रभावित गांवों में स्वतंत्रता के उत्सव की तैयारियां चल रही है। एमएमसी जोन (महाराष्‍ट्र-मध्‍यप् रदेश- छत्‍तीसगढ़) में शामिल राजनांदगांव, खैरागढ़, बालाघाट और गोंदिया क्षेत्र के 80 से अधिक अतिसंवेदनशील रहे गांवों में आज सुबह संयुक्त बलों के साथ ग्रामीण स्वतंत्रता का जश्‍न मनाएंगे। 31 मार्च को अविभाजित राजनांदगांव के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद ये पहला मौका है।

तीनों राज्‍यों के संयुक्त सुरक्षा बल ने स्वतंत्रता दिवस के आयोजन की कमान संभाल रखी है। तैयारी है कि सुबह सात से आठ बजे के बीच सभी संवेदनशील गांवों में ग्रामीणों के साथ सुरक्षा बल ध्वजारोहण करेंगे। इस मौके पर छोटे-बड़े आयोजन किए जाएंगे।

अतिसंवेदनशील गांवों से आकर परेड देखेंगे बच्चे एसपी एमएमएसी वायपी सिंह ने बताया कि बुकमरका, आमाकोड़ो, कोकाटोला, पेंदोड़ी, मूचर जैसे अतिसंवेदनशील गांव जहां लास्ट तक नक्सलियों का लोकेशन रहा है। यहां के बच्चों को 15 अगस्त के आयोजन में जिला मुख्यालय में लाकर परेड दिखाएंगे। उन्हें पुलिस की वर्किंग से अवगत कराएंगे।

इस बार उत्साह से स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा अति संवेदनशील नक्सल प्रभावित रहे गांव में उत्साह से स्वतंत्रता दिवस मनाया जायेगा। पुलिस और आईटीबीपी की टीम भी ग्रामीणों के साथ जश्‍न मनाएंगे। क्षेत्र में लगातार सिविक एक्‍शन प्रोग्राम और ग्रामीणों से जुड़ाव के कार्यक्रम चल रहे हैं। – अजय यादव, आईजी राजनांदगांव रेंज

पहले औपचारिकता ही रह जाता था कोई भी उत्सव नक्सल दहशत के साये में सिमट इन गांवों में पंचायत सरकार भी कठपुतली ही बनकर रह जाती थी। ऐसे में किसी भी तरह के उत्सव औपचारिकता ही बनकर रह जाते थे। स्कूलों में और न ही गांवों में किसी तरह के आयोजन हो पाते थे। बीते दो वर्षों में ही यह तस्‍वीर बदली। महाराष्‍ट्र और बालाघाट के साथ छत्तीसगढ़ की ओर से सुरक्षा बलों के संयुक्त सुरक्षा बलों ने एक एक कर गांवों से नक्‍सलियों का वर्चस्व खत्‍म कर उन्‍हें जंगल तक ही समेट दिया।

नक्सल पर्चों से दहशत फैलाते, धमकाते थे एमएमसी जोन के इन नक्सल प्रभावित अतिसंवेदनशील गांव के लोग हमेशा दहशत के साये में जीते रहे। टुकड़ियों में यहां पहुंचकर माओवादियों ग्रामीणों की बैठक लेकर उन्‍हें धमकाते थे। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों से इन्हें दूरी बनाए रखने कहा जाता था। सुरक्षा बलों के साथ होने या संपर्क रखने पर मौत की सजा सुनाई जाती थी। कई वर्षों के संघर्ष के बाद अब इस दौर का खात्मा हुआ है।

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