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राजनांदगांव : ज्ञान और त्याग कोई डिग्री नहीं है, जिसका प्रदर्शन किया जाए …

CG: Another murder incident in Mandir

राजनांदगांव l जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य श्रेयांशप्रभ सागर ने शुक्रवार को कहा कि हमें किसी भी धर्म या व्यक्ति की असाधना करने का अधिकार नहीं है। हमें किसी को गलत कहने का कोई हक नहीं है। किसी भी धर्म का अपमान मत करो।

जब तक किसी चीज का ज्ञान नहीं है तब तक उस संबंध में टिप्पणी मत करो। मुनि ने कहा कि दूसरे धर्म के साधु संतों ने भी मोक्ष प्राप्त किया है। आपको अपने ऊपर तथा अपने ज्ञान के ऊपर घमंड नहीं करना चाहिए। ज्ञानी कभी नहीं बोलता कि मैं ज्ञानी हूं यदि वह ऐसा बोलता है तो फिर वह ज्ञानी कैसा! त्यागी कभी नहीं बोलना कि मैं त्यागी हूं। मुनि श्री ने कहा कि जहां जरूरत है, वहीं कुछ कहो। ज्ञान और त्याग कोई डिग्री नहीं है, जिसका प्रदर्शन िकया जाए। गुणी व्यक्ति कभी दिखावा नहीं करता। उन्होंने कहा कि बिना मांगे दी गई सलाह की कोई कीमत नहीं होती।

मुनि ने कहा कि कोई भी धर्म हो उसके बारे में कुछ मत बोलो। यदि आपको समझ में नहीं आ रहा हो तो मत बोलो और समझने की कोशिश करो। सच कभी बदलता नहीं है। इस दुनिया में सब कुछ हो सकता है। जो भी मनुष्य की कल्पना शक्ति है वे सभी पृथ्वी में मौजूद है।

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