राजनांदगांव , बदलाव हमेशा बड़े कदम से नहीं, छोटे प्रयास से शुरू होता है। ग्राम पेंडरवानी की कनिष्का पटेल ने महिला और किशोरी स्वास्थ्य को अपनी मुहिम का केंद्र बनाकर मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक संकोच, भ्रांतियों और नकारात्मक धारणाओं के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया।
गांव से शुरू हुई उनकी पहल अब करीब 50 गांवों की 10 हजार महिलाओं तक पहुंच चुकी है। वहीं स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रमों के माध्यम से 20 हजार से अधिक छात्राओं को मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन की जानकारी दी गई है। कनिष्का ने किशोरियों और महिलाओं को स्वच्छता बनाए रखने, सेनेटरी नैपकिन के सुरक्षित एवं नियमित उपयोग और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के प्रति जागरूक किया। जरूरतमंदों तक गुणवत्तापूर्ण सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए। जिस विषय पर परिवारों में खुलकर बात करने में झिझक होती थी, उसे उन्होंने गांवों और शिक्षण संस्थानों में संवाद का हिस्सा बनाया।
स्वास्थ्य कार्यक्रम में उनकी हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही विगत 6 सालों से कनिष्का महिला सशक्तिकरण, मासिक धर्म स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और पोषण पर गांवों में लोगों को जागरूक कर रही है। प्रयास को राष्ट्रीय पहचान मिली। सहारनपुर में हिंदुस्तान यूथ आइकॉन अवार्ड मिला और उनका नाम हिंदुस्तान यूथ आइकॉन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। देश के 15 राज्यों से चुने गए युवा समाज सेवियों में वह सम्मानित होकर जिले का मान बढ़ाया। पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण, साइबर सुरक्षा शिक्षा, स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उनकी अहम भूमिका रही।

