राजनांदगांव , सावन की फुहार, झूले और लोकगीतों की धुन में गणेश मंदिर परिसर में देवांगन समाज की महिलाओं ने सावन उत्सव मनाया। सावन उत्सव के बहाने संस्कृति और परंपरा को जीवंत किया। तुलसीपुर-ममतानगर इकाई ने पूनम कॉलोनी स्थित गणेश मंदिर परिसर में आयोजित सावन झूला महोत्सव में महिलाओं ने पारंपरिक परिधान और आभूषणों के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
आयोजन में सनातन संस्कृति, लोकाचार और सामाजिक एकता की खूबसूरत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत समाज की आराध्य कुलदेवी माता परमेश्वरी की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद सबसे पहले माता परमेश्वरी को झूला झुलाया गया। महिलाओं ने बारी-बारी से झूला झूलकर सावन उत्सव की शुरुआत की। इस दौरान सावन के पारंपरिक गीत गूंजते रहे और गीत-संगीत के साथ पूरा वातावरण उत्साह से भर गया।
धार्मिक मान्यताओं में सावन मास को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना गया है। इस महीने में शिव पूजा, जलाभिषेक और सोमवार व्रत की परंपरा है। प्रकृति की दृष्टि से भी सावन वर्षा, हरियाली, नवजीवन का संदेश लेकर आता है। भारतीय लोक परंपरा में सावन के साथ झूले, लोकगीत और सामूहिक उत्सव की परंपरा भी जुड़ी हुई है। महिलाओं का सावन में झूला झूलना और लोकगीत गाना इसी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है।
महिलाओं ने उत्साह के साथ खेल में हिस्सा लिया आयोजन के दौरान विभिन्न मनोरंजक खेल और प्रतियोगिताएं भी हुईं। महिलाओं ने उत्साह के साथ इन खेलों में हिस्सा लिया। गीत-संगीत, हंसी-मजाक और खेलों ने आयोजन को यादगार बना दिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम की रौनक और बढ़ा दी। सावन में झूला झूलने की परंपरा भारतीय लोक संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही है।
गीत-संगीत के साथ एकता का संदेश दिया माता परमेश्वरी की पूजा और झूला झुलाने के साथ ही शुरू हुआ यह उत्सव खेल, गीत-संगीत और हंसी-खुशी के बीच आगे बढ़ा। महिलाओं ने कहा कि सावन जैसे पारंपरिक पर्व सामूहिक रूप से मनाने से नई पीढ़ी को संस्कृति और लोकाचार से जोड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन महिलाओं के बीच आपसी मेल-जोल बढ़ाने के साथ सामाजिक एकता को भी मजबूत करते हैं।

