राजनांदगांव , जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर के शिष्य श्रेयांशप्रभ सागर ने शनिवार को कहा कि हम अपने विचारों को रोकने और नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। यह ठीक नहीं है, बहाव को कभी रोकें नहीं बल्कि दिशा बदल दें तो बदलाव निश्चित है।
उन्होंने कहा कि हम अक्सर बहाव को रोकने की कोशिश में लगे रहते हैं, जिसकी वजह से हमें अनेक परेशानियों को सामना करना पड़ता है। बहाव को कभी रोकें नहीं बल्कि सही मोड़ आने पर उसका रुख बदल दें, इसका सुखद परिणाम सामने आएगा। कहा कि पानी, आग और हवा को रोकने की कोशिश करने से यह कभी नहीं रुकेंगे, इसलिए इनकी दिशा बदल दो। इसी तरह गुस्से को भी रोके नहीं बल्कि उसकी दिशा बदल दें। यह बेहतर उपाय है। कहा कि कुछ समय के लिए बदलाव नहीं चाहिए बल्कि बदलाव स्थानीय होना चाहिए।
आप वही करें जिससे मन खुश होता है: कहा कि फ्लो को रोकने की कोशिश करने के बजाय या तो उसका सामना करो या फिर रास्ता छोड़कर दूर चले जाओ। कभी भी अपने भावों को दूसरे कामों में लगाकर टालने की कोशिश मत कीजिए, उसका सामना कीजिए या फिर रास्ता छोड़ दीजिए। आप वही करें जिससे मन खुश होता है। हम लोगों को तो धन्यवाद तो देते ही है किंतु जो हम कर रहे हैं उसके लिए मन को भी धन्यवाद दें। एक बार आप खुश रहना सीख जाएं तो मन आपके भावों की दिशा स्वयं ही बदल देगा।

