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छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिली मदद, हरमनिया देवी के सपनों को मिली नई उड़ान …

छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिली मदद, हरमनिया देवी के सपनों को मिली नई उड़ान ...

छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिली मदद, हरमनिया देवी के सपनों को मिली नई उड़ान ...

एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया किराना और सिंगार व्यवसाय, आज समूह की महिलाओं के लिए बना आत्मनिर्भरता का आधार

रायपुर : कभी आजीविका के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहने वाली सरगुजा जिला ग्राम पंचायत मेंड्राकला की निवासी श्रीमती हरमनिया देवी राजवाड़े ने अब अपने हुनर और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले एक लाख रुपये के ऋण ने उनके आकांक्षा स्व-सहायता समूह को स्वरोजगार का अवसर दिया। इसी आर्थिक सहयोग से शुरू की गई किराना और सिंगार सामग्री की दुकान आज समूह की महिलाओं की नियमित आय का जरिया बन रही है।

आकांक्षा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हरमनिया देवी बताती हैं कि समूह की महिलाओं के सामने ऐसी आजीविका गतिविधि शुरू करने की चुनौती थी, जिससे नियमित आमदनी हो सके। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिलने वाले ऋण की जानकारी मिली। उन्होंने समूह की महिलाओं से चर्चा कर आवेदन किया और ऋण स्वीकृत होने के बाद मिली राशि से व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।

छोटी पूंजी बनी बड़े बदलाव की शुरुआत

एक लाख रुपये की ऋण सहायता से समूह ने ग्रामीण क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किराना और सिंगार सामग्री की दुकान शुरू की। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान और सिंगार सामग्री एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से दुकान को धीरे-धीरे ग्राहकों का अच्छा प्रतिसाद मिलने लगा।

हरमनिया देवी कहती हैं कि ऋण की राशि ने केवल दुकान शुरू करने के लिए पूंजी नहीं दी, बल्कि समूह की महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का भरोसा भी दिया। आज महिलाएं मिलकर दुकान का संचालन कर रही हैं और अपनी मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं।

आय बढ़ी तो परिवार की खुशियां भी बढ़ीं

आजीविका गतिविधि से होने वाली आमदनी का असर अब समूह की महिलाओं के परिवारों पर भी दिखाई देने लगा है। आय में सुधार से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, घरेलू जरूरतों और दैनिक खर्चों को पूरा करने में पहले की तुलना में आसानी हुई है।
हरमनिया देवी बताती हैं कि पहले आर्थिक जरूरतों के लिए कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब नियमित आय का साधन होने से परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है। व्यवसाय ने समूह की महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत किया है।

महिला कोष बना आत्मनिर्भरता का संबल

हरमनिया देवी के लिए छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिला ऋण सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का अवसर है। समूह की महिलाओं ने सामूहिक निर्णय और आपसी सहयोग से ऋण राशि का उपयोग किया और उसे आजीविका के साधन में बदला।वह कहती हैं, “एक लाख रुपये की ऋण सहायता से शुरू हुई दुकान आज हमारे समूह की आजीविका का आधार बन रही है। इससे हमें नियमित आमदनी के साथ अपने परिवार को बेहतर ढंग से संभालने का आत्मविश्वास मिला है।”

हरमनिया देवी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने वाली योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की मजबूत आधारशिला बन रही हैं।

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