दुर्ग,
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिला पंचायत दुर्ग के मार्गदर्शन में ग्रामीण अंचल में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग दुबे के कुशल नेतृत्व में संचालित इस अभियान से जिले की ग्राम पंचायतों और स्वच्छाग्रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं को अभूतपूर्व लाभ मिल रहा है।
सभी गांवों में रूट चार्ट और ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण
जिले के तीनों विकास खंडों—दुर्ग, धमधा एवं पाटन में प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए कुल 47 रूट चार्ट तैयार किए गए हैं। इसके तहत प्रत्येक गांव में निर्मित सेग्रीगेशन शेड से ई-रिक्शा के माध्यम से प्रतिदिन कचरा संग्रहित किया जा रहा है। इस व्यवस्था से गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित हो रही है।
लाल और काले डब्बे की अनूठी पहल
पत्र में दिए गए नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप, अब कचरा संग्रहण करने वाले ई-रिक्शा में लाल एवं काले रंग के डब्बे जोड़े जा रहे हैं, सूखे, गीले और विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट (विशेषकर प्लास्टिक कचरा) को शुरुआत से ही पृथक-पृथक (अलग-अलग) रूप में एकत्र किया जा सके। इसके लिए गांवों में व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।
स्वच्छाग्रही महिलाओं का आजीविका वर्धन और मानदेय भुगतान
यह अभियान केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण महिलाओं का आजीविका वर्धन भी हो रहा है। स्वच्छाग्रही स्व-सहायता समूह की दीदियाँ घरों और सेग्रीगेशन शेड से प्लास्टिक अपशिष्ट को अलग कर व्यवस्थित बोरियों में भरकर वजन दर्ज कर रही हैं। तत्पश्चात, इस एकत्रित प्लास्टिक को विकास खंड स्तर पर तैयार की गई प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (PWMU) तक पहुँचाया जा रहा है और कबाड़ी वाले को उचित बाजार मूल्य पर विक्रय किया जा रहा है, जिससे स्व-सहायता समूहों की आय में वृद्धि हो रही है।
इसके साथ ही, अभियान के सुचारू संचालन के लिए स्वच्छाग्रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं का माह अगस्त तक का मानदेय भुगतान समय पर सुनिश्चित किए जाने पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
15 सितंबर को होगा प्लास्टिक का विक्रय एवं रीसाइक्लिंग
इस विशेष अभियान के तहत 01 से 15 सितंबर 2026 तक सभी गांवों में लगातार कार्य किया जा रहा है। आगामी 15 सितंबर को एकत्र किए गए प्लास्टिक को प्रोसेस कर रीसाइक्लिंग हेतु विक्रय किया जाएगा। जिला प्रशासन की इस दूरदर्शी पहल से ग्रामीण क्षेत्र न केवल स्वच्छ और सुंदर बन रहे हैं, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

