डोंगरगांव , नगर में बुधवार को मुख्य मार्गों और चौक-चौराहों पर बैठे घुमंतू मवेशियों को हटाने के लिए अभियान चलाया। नगर पालिका के कर्मचारियों ने पुराने बस स्टैंड क्षेत्र, श्रीराम चौक, संजय चौक, रावणभाठा तथा शनि मंदिर चौक सहित प्रमुख स्थानों से मवेशियों को कैचर वाहन में भरकर हटाया, लेकिन अभियान की तस्वीर शाम होते-होते ही बदल गई। जिन सड़कों से मवेशियों को हटाया गया था, वहां फिर से उनका जमावड़ा दिखाई देने लगा।
कई मवेशियों को नगर पालिका कार्यालय के आसपास और खुले मैदान में छोड़ दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर पालिका क्षेत्र में बाकायदा कांजीहाउस मौजूद है तो पकड़े गए मवेशियों को वहां रखने के बजाय खुले मैदान में छोड़ने की व्यवस्था क्यों की जा रही है? यदि यही प्रक्रिया जारी रही तो एक दिन का अभियान महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा। नगर में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और मुख्य मार्ग पर मवेशियों के जमावड़े को देखते हुए एसडीएम को स्वतः संज्ञान लेकर नगर पालिका, पुलिस और संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक बुलाकर स्थायी कार्ययोजना बनानी चाहिए। बिलासपुर और रायपुर जैसे शहरों में सड़क पर आवारा मवेशियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर की गई सख्ती की तर्ज पर यहां भी प्रभावी व्यवस्था लागू कर ने की जरूरत है।
दोपहिया चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा अंतरराज्यीय मुख्य मार्ग सहित नगर के प्रमुख चौक-चौराहों पर मवेशियों का जमावड़ा दोपहिया वाहन चालकों के लिए लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। पिछले सप्ताह खुज्जी के एक युवक की नगरीय क्षेत्र में मवेशी से टकराने के बाद मौत हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार एक वर्ष के भीतर मवेशियों के कारण यह तीसरी मौत है। इसके अलावा कितने लोग घायल हुए, इसका कोई अधिकृत आंकड़ा सामने नहीं आया है। इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई हादसे के बाद कुछ घंटों या एक-दो दिन के अभियान तक सीमित दिखाई देती है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।
सड़कों पर छोड़ने वाले पशुपालकों पर कार्रवाई हो सड़क पर घूम रहे मवेशियों को पकड़ना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। असली कार्रवाई उन पशुपालकों पर होनी चाहिए जो अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं। नगर पालिका को अभियान के दौरान पकड़े गए मवेशियों की पहचान कर उनके मालिकों का पता लगाना चाहिए और लागू नगर पालिका नियमों तथा छत्तीसगढ़ पशु (नियंत्रण) अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के तहत उपलब्ध कार्रवाई करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर प्रशासन को पुलिस व राजस्व अमले के साथ कार्रवाई कर ऐसे पशुपालकों को चिन्हित करना चाहिए, ताकि मवेशियों को दोबारा सड़क पर छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगे। लोगों को राहत मिल सके।
निगरानी नहीं होने से सब पुराने ढर्रे पर लौट आता है कांजीहाउस का नियमित संचालन, पकड़े गए मवेशियों की सुरक्षित अभिरक्षा, पशुपालकों की पहचान, जुर्माना अन्य वैधानिक कार्रवाई और बार-बार मवेशी छोड़ने वालों की निगरानी इन सभी पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। लोगों का आक्रोश तब बढ़ता है जब हादसा होता है तब अधिकारी सक्रिय होते हैं, कुछ दिनों तक कार्रवाई होती है और फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। मवेशियों को एक जगह से दूसरी जगह छोड़ना अभियान नहीं है। असली अभियान तब माना जाएगा, जब सड़क से मवेशी हटे, कांजीहाउस प्रभावी रूप से चले और खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों पर लगातार वैधानिक कार्रवाई हो।

