खैरागढ़ : वर्ष 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले को लेकर कांग्रेस ने असंतोष जताया है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कोमल साहू ने पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस न्यायालय के फैसले का अनादर नहीं करती, लेकिन पार्टी इस निर्णय से संतुष्ट भी नहीं है। कहा कि झीरम घाटी हमले की पूरी साजिश सामने आना जरूरी है और मामले में कथित बड़े नक्सली नेताओं तथा मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका की गहराई से जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 2013 में झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में छत्तीसगढ़ के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सहित कुल 32 लोगों की मौत हुई थी। पार्टी का कहना है कि यह केवल एक हमला नहीं, बल्कि प्रदेश के राजनीतिक इतिहास की गंभीर और दर्दनाक घटना थी, इसलिए इसके पीछे की पूरी साजिश का खुलासा होना जरूरी है। कोमल ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान रमन्ना सहित कई बड़े नक्सली नेताओं के नाम सामने आए थे, लेकिन हमले के पीछे उनकी कथित भूमिका को लेकर अब तक पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो सकी है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि इतने बड़े हमले के मामले में निचले स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई के बावजूद बड़े नक्सली नेतृत्व की जवाबदेही अब तक तय क्यों नहीं हो पाई।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पूछताछ की मांगछ: कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने के बावजूद झीरम घाटी हमले के संबंध में उनसे पर्याप्त पूछताछ नहीं की गई। पार्टी का कहना है कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ कर हमले के कथित मुख्य सरगनाओं और साजिशकर्ताओं तक पहुंचने की कोशिश की जानी चाहिए।

