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CG : केसीजी जिले में बारिश की बेरुखी से खेती पर संकट, निदाई-गुड़ाई, खाद डालना तक बंद …

CG : केसीजी जिले में बारिश की बेरुखी से खेती पर संकट, निदाई-गुड़ाई, खाद डालना तक बंद …

CG : केसीजी जिले में बारिश की बेरुखी से खेती पर संकट, निदाई-गुड़ाई, खाद डालना तक बंद …

खैरागढ़ l सावन-भादो में जिस बारिश का किसान बेसब्री से इंतजार करता है, वही इस बार मानो रूठ गई है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) क्षेत्र में बारिश की कमी ने खेतों की तस्वीर बदल दी है। धान के खेतों में जगह-जगह दरारें पड़ने लगी हैं और फसल की बढ़वार भी प्रभावित हो रही है। नवागांव के आसपास कई किसानों ने निदाई-गुड़ाई रोक दी है, वहीं बढ़ईटोला क्षेत्र में भी किसान पानी का इंतजार करते-करते खेत में काम बंद करने की स्थिति में हैं।

हालात ऐसे हैं कि जिस धान की निराई आमतौर पर किसान बारिश के बीच चप्पल उतारकर किया करते थे, उसी खेत में अब दरारों के बीच किसान चप्पल पहनकर निदाई करने को मजबूर हैं। जिले किसानों का कहना है कि लगातार बारिश नहीं होने के कारण धान की फसल में खाद डालने और निदाई-गुड़ाई पर खर्च करना भी जोखिम भरा लग रहा है। कई किसानों ने काम रोक दिया है और अब उनकी नजर आसमान पर टिकी है। वनांचल क्षेत्र के बेलगांव से लेकर जालबांधा, बढ़ईटोला, बल्देवपुर, पेंड्री और दपका सहित पूरे क्षेत्र में कम बारिश का असर दिखाई दे रहा है। नदी-नाले और डैम भी पर्याप्त पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। जिन किसानों के पास ट्यूबवेल या अन्य सिंचाई साधन हैं, उनके खेतों में फसल अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन वहां भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना चुनौती है।

बारिश नहीं होने के कारण गांव के नदी-नाले सूख गए ग्राम बेलगांव के पुनऊ राम ने कहा कि बारिश नहीं होने से नदी-नाले सूख गए हैं। अब तक फसल की पैदावार में करीब 50 फीसदी नुकसान हो चुका है। बारिश नहीं हुई तो नुकसान 70-80 फीसदी से बढ़कर शत-प्रतिशत तक पहुंच सकता है। बढ़ईटोला के उमेश्वर वर्मा ने कहा कि क्षेत्र में न पानी है, न नहर की सुविधा। बारिश की उम्मीद में काम जारी है, लेकिन यही स्थिति रही तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। कई किसानों ने तो खेत छोड़ दिए हैं। घोटिया के हितेश साहू ने कहा कि हमारी जमीन मुरुम वाली है, इसलिए समस्या है।

जिला केसीजी कृषि उप संचालक राजकुमार सोलंकी ने बताया कि जिले में बारिश की स्थिति पर्याप्त है। विगत 10 वर्षों की औसत वर्षा के मुकाबले अब तक करीब 97 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग की आगामी सप्ताह की रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

24 घंटे में केवल 8-9 घंटे ही हो रही बिजली सप्लाई सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए बिजली कटौती ने मुश्किल और बढ़ा दी है। किसानों के मुताबिक सिंचाई के साधन उपलब्ध होने के बावजूद 24 घंटे में करीब 8 से 9 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। ऐसे में ट्यूबवेल से भी सीमित खेतों की सिंचाई हो पा रही है और एक किसान के सामने पूरी फसल को बचाने की चुनौती खड़ी है। बारिश के भरोसे बोई गई फसल अब पानी मांग रही है, लेकिन आसमान से पानी नहीं बरस रहा और जमीन से पानी निकालने के लिए बिजली का साथ नहीं मिल रहा। ऐसे में किसान हताश हैं।

लाखों का कर्ज लेकर की गई बुवाई, अब फिक्र बढ़ी किसानों ने खेती के लिए खाद, बीज, मजदूरी और अन्य जरूरतों में बड़ी रकम खर्च की है। कई किसान कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन अब फसल की हालत देखकर उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। खेतों में पानी नहीं होने से धान की बढ़वार प्रभावित है और पैदावार को लेकर भी किसान आशंकित हैं। किसान के लिए सबसे दर्दनाक स्थिति यह है कि कर्ज चुकाने की उम्मीद जिस फसल से थी, वही फसल अब पानी के अभाव में संकट में है। खेत में खड़ी कमजोर फसल को देखकर किसान के चेहरे की चिंता साफ दिखाई दे रही है।

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