राजनांदगांव l गरीब घर की बेटियों ने हॉकी थाम कर अपनी आगे की पढ़ाई और खेल के साथ अपने भविष्य की मजबूत नींव रख मिसाल पेश की है। मोनिष्का विश्वकर्मा का चयन आवासीय स्पोर्ट्स अकादमी में हुआ है। उनकी मां मंजू विश्वकर्मा शादी-पार्टियों में भोजन बनाने का काम करती है और पिता कृष्णा विश्वकर्मा किराना दुकान में काम करते है। उन्होंने अपनी बेटी के चयन तक कोई कसर नहीं छोड़ी। कनक मरकाम का चयन साई में हुआ है। तीन बहनों में बड़ी है पिता का निधन होने के बाद मां संतोषी मरकाम ने उसे बढ़ने में मदद की।
पटरी पार चिखली स्कूल मैदान की मिट्टी पर हॉकी स्टिक थामने वाले बच्चों ने अब बड़े खेल मैदानों की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और कोच मृणाल चौबे इन बच्चों को रुद्राक्षम वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम लगातार निशुल्क हॉकी की कोचिंग दे रहे हैं।
पति के निधन के बाद मां ने बेटी को आगे बढ़ाया इससे पहले 12 वर्षीय नमन यादव का चयन आर्मी बॉयज कंपनी, बैंगलुरु के लिए हुआ है। नमन छत्तीसगढ़ से चयनित एकमात्र खिलाड़ी हैं। सफलताओं के पीछे उनके परिवारों का त्याग भी है। कनक मरकाम तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं। पिता स्व. गजेंद्र मरकाम के निधन के बाद मां संतोषी मरकाम ने सीमित संसाधनों में बेटियों की पढ़ाई और सपनों को आगे बढ़ाया। उन्होंने खेल की बारीकियां सीखीं और आज चयनित होकर अपने भविष्य की मजबूत नींव रखी।

