राजनांदगांव , जबलपुर से पहुंचीं संत निरंकारी मिशन की बहन जागृति वाधवा ने रविवार को सिंधु भवन, लालबाग में आयोजित इंग्लिश मीडियम समागम में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भक्त परमात्मा को हर समय अपने नजदीक जानकर केवल सबके भले की बात नहीं करते, बल्कि दिल से सबका भला सोचते और उसके लिए प्रयास भी करते हैं। उनके हृदय में जब नाम का वास होता है तो ‘न को बैरी न ही बेगाना, सकल संग हमको बनि आई’ की भावना विकसित होती है।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित जोनल समागम में दुर्ग, भिलाई, रायपुर, भाटापारा, कांकेर, डोंगरगढ़, कवर्धा और खैरागढ़ से पहुंचे भाई-बहनों ने अंग्रेजी भाषा में भजन, गीत, कविताएं एवं आध्यात्मिक विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में साध-संगत ने ब्रह्मज्ञान, सतगुरु और निरंकार परमात्मा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। समागम को सफल बनाने में संत निरंकारी मंडल के संयोजक रूपलाल राजवानी का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम की जानकारी मीडिया प्रभारी मदनलाल नवलानी ने दी। उन्होंने समागम में शामिल सभी भक्तों के प्रति आभार जताया ।
निराकार प्रभु के ज्ञान से आती है नम्रता: बहन जागृति वाधवा ने कहा कि भक्त तन, मन और धन को हमेशा प्रभु की अमानत समझते हैं। वे ‘मैं’ और ‘मेरी’ की भावना से ऊपर उठकर जीवन जीते हैं तथा हर व्यक्ति में निराकार दातार के दर्शन करते हुए स्वयं को सबका सेवक मानते हैं। उन्होंने कहा कि सच्चे भक्त जीवन-मुक्त भाव से रहते हैं। सम्मान मिलने पर भी उनमें अभिमान नहीं आता। जोनल इंचार्ज महात्मा गुरुबक्श सिंह जी कालरा, रायपुर ने साध-संगत को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक मनुष्य सतगुरु से जुड़ा रहता है, तब तक उसके कर्मों में सुधार आता है।

