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भिलाई के गीतांश बामनिया की बड़ी कामयाबी, Rentomojo ला रही ₹1,266 करोड़ का IPO

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भिलाई 
 शहर के कारोबारी गीतांश बामनिया ने अपनी कंपनी रेंटोमोजो का 1,266 करोड़ का आइपीओ बाजार में उतारकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेंटोमोजो की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) 9 सितंबर को खुली और 11 सितंबर को बंद हुई। कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग 17 सितंबर को प्रस्तावित है।

बता दें कि रेंटोमोजो एक प्रमुख भारतीय आनलाइन रेंटल प्लेटफार्म है। यह कंपनी ग्राहकों को घर और आफिस के उपयोग के लिए फर्नीचर, घरेलू उपकरण (जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन) और इलेक्ट्रानिक्स सामान मासिक किराए या सब्सक्रिप्शन माडल पर उपलब्ध कराती है।

भिलाई में पले-बढ़े, दो स्टार्टअप रहे असफल
    गीतांश भिलाई में ही पले-बढ़े हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेक्टर-10 इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी स्कूल से पढ़ाई करने वाले गीतांश ने आइआइटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

 इसके बाद उन्होंने केपीएमजी और फ्लिपकार्ट जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। फिर उन्होंने खुद उद्यमी बनने का निर्णय लिया, दो स्टार्टअप भी शुरू किए, जो असफल रहे।

    असफलता से सीखते हुए उन्होंने वर्ष 2012 में ‘रेंटोमोजो’ की शुरुआत की। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया और ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई।

असफलताओं से मिली सीख बनी कारोबार की ताकत
    रेंटोमोजो के सफर में गीतांश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने शुरुआती असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। 

कारोबार में आने वाली चुनौतियों को समझते हुए उन्होंने माडल में बदलाव किए और बाजार की जरूरत के अनुरूप कंपनी को आगे बढ़ाया।

अब 1,266 करोड़ रुपये के आइपीओ के जरिए कंपनी ने पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए पेश किए हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री बाजार में की जा सकेगी।

पिता से कारोबार की प्रेरणा, मां चिकित्सा क्षेत्र में रहीं अग्रणी
गीतांश अपने कारोबारी दृष्टिकोण के लिए परिवार से मिली प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके पिता जगदीश बामनिया भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्ति के बाद करीब 10 वर्षों तक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के व्यवसाय से जुड़े रहे। उनकी मां डॉ. मीरा बामनिया बीएसपी के जेएलएन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर सेक्टर-नौ में बाल एवं शिशु रोग विभाग की प्रमुख रहीं और वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुईं।

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