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राजनांदगांव : जैसा परिवेश होगा, वैसे ही पड़ेंगे बालक के संस्कार: आचार्य …

राजनांदगांव : जैसा परिवेश होगा, वैसे ही पड़ेंगे बालक के संस्कार: आचार्य …

राजनांदगांव : जैसा परिवेश होगा, वैसे ही पड़ेंगे बालक के संस्कार: आचार्य …

राजनांदगांव l शहर के श्री अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तीसरे दिन व्यास पीठ से कथावाचक आचार्य बांके बिहारी गोस्वामी ने ज्ञान, भक्ति और जीवन मूल्यों की अविरल धारा बहाई। कथा प्रसंग के दौरान उन्होंने सनातन संस्कृति, पारिवारिक वातावरण और मानव जीवन के वास्तविक दायित्वों के बारे में बताया।

आचार्य ने संस्कारों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बालक को हम जिस परिवेश में रखेंगे, उसमें वैसे ही संस्कार ढलेंगे। इसलिए आवश्यक है कि हर परिवार अपने घर का वातावरण सनातन संस्कृति के अनुरूप रखे और बच्चों को शिक्षित व संस्कारी बनाने की प्रेरणा दे। उन्होंने ध्रुव जी का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने आचार-विचार स्वच्छ रखकर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था अटल रखनी चाहिए।

कथा व्यास ने कहा कि हम जो भी कार्य करते हैं, वह परमात्मा की प्रेरणा से ही संभव होता है। जब व्यक्ति किसी कार्य का श्रेय स्वयं लेने लगता है, तो उसमें होने वाली त्रुटियों का दोषी भी वह स्वयं बन जाता है। यदि कार्य को कुलदेवी व पितृ देवों के आशीर्वाद का भाव रखकर किया जाए, तो दोष नहीं लगता। धर्म ही प्राणी का सच्चा सखा, माता-पिता और बंधु है। परिस्थिति कैसी भी हो, धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

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