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राजनांदगांव : 35 झांकी बनाने में खर्च होंगे 3 करोड़, लागत 10% बढ़ी…

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राजनांदगांव , शहर में निकलने वाली विसर्जन झांकी की परंपरा महंगी हो गई है। झांकियों के निर्माण में करीब 10% की बढ़ोतरी हुई है। इस बार शहर में करीब 35 झांकी विसर्जन के दौरान निकलेगी। इसमें 3 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान हैं खास बात यह है​ कि महंगाई की मार ने भी शहर की ऐहासिक परंपरा को प्रभावित नहीं किया है। बीते सालों की तरह ही झांकियों की संख्या इस बार भी मौजूद हैँ। वहीं इस बार कई समितियां चार जीप की लंबी झांकी भी तैयार कर रही है। जिसमें औसत 15 लाख रुपए तक का खर्च का आ रहा है। झांकियों के निर्माण से जुड़े रघु शर्मा ने बताया कि एक जीप के झांकी के निर्माण में औसत 3 लाख रुपए तक खर्च हो रहा है। झांकियों में इस्तेमाल होने वाली डिजिटल व सामान्य लाइटों की कीमत बढ़ी है।

झांकियों में हजारों की संख्या में लाइट का इस्तेमाल होता है। इसी तरह फाइबर की मूर्तियों के दाम भी बढ़ गए हैं। आमतौर पर समितियां दो से तीन जीप की झांकी बनाती है। इनमें 8 से 10 लाख रुपए तक का खर्च इस साल आ रहा है। शहर की परंपरा को बनाए रखने पूरी भव्यता से झांकियों का निर्माण हो रहा। समितियों ने अपनी झांकियों को और भी आकर्षक बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी प्रयोग किया है। आस्था के साथ कला व संस्कृति का भी संगम: 25 सितंबर की रात शहर में विसर्जन झांकियां निकलेगी। इस बार झांकियों में पौराणिक प्रसंगों के अलावा कला व संस्कृति की भी झलक दिखेगी। वहीं बदलते परिवेश और देश की बड़ी घटनाओं को भी झांकियों में प्रस्तुत करने की तैयारी है।

साउंड सिस्टम, बैंड और जनरेटर का खर्च अलग समितियों ने बताया कि झांकियों के निर्माण के बाद विसर्जन के दौरान रुट पर लाने के लिए जनरेटर, साउंड सिस्टम, बैंड और दूसरी जरूरतें भी होती है। इसका खर्च अलग से करना होता है। हर झांकी में औसत डेढ़ लाख रुपए तक का साउंड सिस्टम, बैंड और कर्मचारियों का खर्च आ रहा है। बावजूद इसके समितियों का उत्साह कम नहीं हुआ है।

शहर में 9 स्थानों पर झांकी निर्माण जारी, रेंट का भी ट्रेंड शहर में अलग-अलग 9 स्थानों पर झांकियों का निर्माण हो रहा है। इसमें स्थानीय कारीगर जुटे हुए हैं। इसके अलावा बीते दो से तीन साल में झांकियां रेंट पर लाने का ट्रेंड भी बढ़ा है। कई समितियां खर्च में कमी लाने के लिए दूसरे शहरों व राज्यों से किराए पर झांकियां जाती है। इससे हर झांकी के पीछे 4 लाख रुपए तक की बचत समितियों की हो जाती है।

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