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CG : IFS अधिकारी पर पत्नी ने लगाए कई गंभीर आरोप …

CG: Another murder incident in Mandir

रायपुर। छत्तीसगढ़ के 2014 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी पंकज सिंह राजपूत और उनकी पत्नी अदिति सिंह के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। अदिति सिंह ने एक वीडियो जारी कर अपने पति के साथ-साथ सास, ससुर और ननद पर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। वहीं पंकज राजपूत ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा है कि यह निजी पारिवारिक मामला है और पिछले करीब पांच वर्षों से अदालत में विचाराधीन है। अदिति सिंह ने वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि उनके पति उनके साथ अपमानजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उनका दावा है कि उनके नाबालिग बेटे के साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया जाता है। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं।

अदिति के मुताबिक वर्ष 2020 में अदालत से नोटिस मिलने के बाद उनके बेटे के लिए हर महीने 8 हजार रुपये दिए जाने लगे। अदिति ने कहा कि बच्चे के भरण-पोषण और जरूरतों से जुड़ी राशि को लेकर भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बैंक लेन-देन में इस रकम को खर्च के तौर पर दर्ज किए जाने का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार बच्चे की शिक्षा, पालन-पोषण और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक जिम्मेदारी का सवाल भी इस विवाद का हिस्सा रहा है। अदिति सिंह ने एक अन्य न्यायिक मामले का भी जिक्र किया। उनके अनुसार पंकज राजपूत की ओर से उनकी मां निर्मला देवी के खिलाफ दायर किया गया मामला हाल ही में एक अदालत ने खारिज कर दिया। अदिति ने इसे भी पारिवारिक विवाद के संदर्भ में सामने रखा है।

हालांकि इस मामले से जुड़े सभी न्यायिक तथ्यों और आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। दूसरी ओर पंकज राजपूत ने मीडिया से बातचीत में पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पूरा विवाद करीब पांच साल से अदालत में चल रहा है और संबंधित पक्ष अपनी बात न्यायालय के सामने रख रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे निजी मामले को सार्वजनिक मंच पर लाना उचित नहीं है। पंकज राजपूत ने खुद को बच्चे का अभिभावक बताते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस बीच पंकज राजपूत के स्टाफ के साथ व्यवहार को लेकर पुरानी शिकायतों का भी उल्लेख सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक महासमुंद में उनकी पोस्टिंग के दौरान स्टाफ की ओर से उन्हें हटाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखे जाने की बात सामने आई थी। हालांकि इन शिकायतों की वर्तमान स्थिति और उन पर हुई विभागीय कार्रवाई को लेकर अलग से आधिकारिक जानकारी जरूरी है। पारिवारिक विवाद से जुड़े आरोप फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के रूप में सामने हैं। मामला अदालत में विचाराधीन बताया जा रहा है, इसलिए आरोपों और उनके कानूनी निष्कर्ष के बीच अंतर रखना जरूरी है।

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