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CG : कहानी सेवा की : पीएम जनमन के पक्के आवास से कमलेश के युवा सपनों को मिली उड़ान

रायपुर, युवावस्था मे जब एक आदिवासी परिवार अपने दायित्वों को समझकर आगे बढ़ना चाहता हो और ठीक उसी समय उन्हे अपने सपनों का मकान मिल जाए तो खुषियां और उत्साह दोनो बढ़ जाते हैं। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत गेजी में रहने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग में बैगा समुदाय के युवा कमलेश के साथ भी कुछ ऐसा ही वाकया हुआ है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत एक पक्का आवास बन जाने के बाद अब युवा कमलेष अपने पत्नी के साथ बच्चों के भविष्य के सपनों को लेकर आशावान हो गया है। पारिवारिक स्थिति कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत का दूरस्थ ग्राम पंचायत गेजी एक अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांव है। यहां के निवासी नोहरसाय के परिवार मे पैदा हुए कमलेश का बालिग होते ही विवाह हो गया। अपने दांपत्य जीवन की शुरूआत उसने अपने पिता के साथ कच्चे मकान में की। बैगा परिवार में  कच्चा मकान और घास फूस से बने छत में जीवन गुजारना चुनौतीपूर्ण होने के साथ युवा कमलेष के लिए एक चिंता का विषय भी था क्योंकि अपने परिवार के लिए कच्चे मकान से आगे बढ़कर एक पक्के आवास का सपना देखता था। जनमन ने बदला जीवन कच्चे घर में अपने परिवार के साथ रहने वाला कमलेश अपनी पत्नी और पालकों के साथ रहते हैं। आजीविका के लिए पति-पत्नी दोनो केवल मजदूरी पर ही निर्भर रहते हैं। सुदूर क्षेत्र होने से आजीविका के सीमित संसाधनों से जीवन चलाते हुए पति पत्नी अपने पक्के मकान का सपना साथ देखते थे। दोनों पति पत्नी के इसी संघर्षपूर्ण जीवन में प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत मिले पक्के आवास से उनके सपनों को एक नई दिशा मिली है। भविष्य की राह ग्राम पंचायत गेजी निवासी युवा कमलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत प्राप्त पक्का मकान उनके लिए सपनों के सच होने जैसा है। जनमन आवास बन जाने के बाद अपने बेहतर भविष्य के लिए ज्यादा परिश्रम करने की बात कहते हुए कमलेश ने अपने पक्के मकान के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनमन योजना के लिए धन्यवाद भी दिया।

रायपुर, युवावस्था मे जब एक आदिवासी परिवार अपने दायित्वों को समझकर आगे बढ़ना चाहता हो और ठीक उसी समय उन्हे अपने सपनों का मकान मिल जाए तो खुषियां और उत्साह दोनो बढ़ जाते हैं। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत गेजी में रहने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग में बैगा समुदाय के युवा कमलेश के साथ भी कुछ ऐसा ही वाकया हुआ है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत एक पक्का आवास बन जाने के बाद अब युवा कमलेष अपने पत्नी के साथ बच्चों के भविष्य के सपनों को लेकर आशावान हो गया है। पारिवारिक स्थिति कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत का दूरस्थ ग्राम पंचायत गेजी एक अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांव है। यहां के निवासी नोहरसाय के परिवार मे पैदा हुए कमलेश का बालिग होते ही विवाह हो गया। अपने दांपत्य जीवन की शुरूआत उसने अपने पिता के साथ कच्चे मकान में की। बैगा परिवार में  कच्चा मकान और घास फूस से बने छत में जीवन गुजारना चुनौतीपूर्ण होने के साथ युवा कमलेष के लिए एक चिंता का विषय भी था क्योंकि अपने परिवार के लिए कच्चे मकान से आगे बढ़कर एक पक्के आवास का सपना देखता था। जनमन ने बदला जीवन कच्चे घर में अपने परिवार के साथ रहने वाला कमलेश अपनी पत्नी और पालकों के साथ रहते हैं। आजीविका के लिए पति-पत्नी दोनो केवल मजदूरी पर ही निर्भर रहते हैं। सुदूर क्षेत्र होने से आजीविका के सीमित संसाधनों से जीवन चलाते हुए पति पत्नी अपने पक्के मकान का सपना साथ देखते थे। दोनों पति पत्नी के इसी संघर्षपूर्ण जीवन में प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत मिले पक्के आवास से उनके सपनों को एक नई दिशा मिली है। भविष्य की राह ग्राम पंचायत गेजी निवासी युवा कमलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत प्राप्त पक्का मकान उनके लिए सपनों के सच होने जैसा है। जनमन आवास बन जाने के बाद अपने बेहतर भविष्य के लिए ज्यादा परिश्रम करने की बात कहते हुए कमलेश ने अपने पक्के मकान के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनमन योजना के लिए धन्यवाद भी दिया।

रायपुर, युवावस्था मे जब एक आदिवासी परिवार अपने दायित्वों को समझकर आगे बढ़ना चाहता हो और ठीक उसी समय उन्हे अपने सपनों का मकान मिल जाए तो खुषियां और उत्साह दोनो बढ़ जाते हैं। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत गेजी में रहने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग में बैगा समुदाय के युवा कमलेश के साथ भी कुछ ऐसा ही वाकया हुआ है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत एक पक्का आवास बन जाने के बाद अब युवा कमलेष अपने पत्नी के साथ बच्चों के भविष्य के सपनों को लेकर आशावान हो गया है।

पारिवारिक स्थिति
कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर जनपद पंचायत का दूरस्थ ग्राम पंचायत गेजी एक अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांव है। यहां के निवासी नोहरसाय के परिवार मे पैदा हुए कमलेश का बालिग होते ही विवाह हो गया। अपने दांपत्य जीवन की शुरूआत उसने अपने पिता के साथ कच्चे मकान में की। बैगा परिवार में  कच्चा मकान और घास फूस से बने छत में जीवन गुजारना चुनौतीपूर्ण होने के साथ युवा कमलेष के लिए एक चिंता का विषय भी था क्योंकि अपने परिवार के लिए कच्चे मकान से आगे बढ़कर एक पक्के आवास का सपना देखता था।

जनमन ने बदला जीवन
कच्चे घर में अपने परिवार के साथ रहने वाला कमलेश अपनी पत्नी और पालकों के साथ रहते हैं। आजीविका के लिए पति-पत्नी दोनो केवल मजदूरी पर ही निर्भर रहते हैं। सुदूर क्षेत्र होने से आजीविका के सीमित संसाधनों से जीवन चलाते हुए पति पत्नी अपने पक्के मकान का सपना साथ देखते थे। दोनों पति पत्नी के इसी संघर्षपूर्ण जीवन में प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत मिले पक्के आवास से उनके सपनों को एक नई दिशा मिली है।

भविष्य की राह
ग्राम पंचायत गेजी निवासी युवा कमलेश ने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत प्राप्त पक्का मकान उनके लिए सपनों के सच होने जैसा है। जनमन आवास बन जाने के बाद अपने बेहतर भविष्य के लिए ज्यादा परिश्रम करने की बात कहते हुए कमलेश ने अपने पक्के मकान के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनमन योजना के लिए धन्यवाद भी दिया।

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