शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक सड़क हादसों की झड़ी, स्पीड कंट्रोल के इंतजाम नाकाफी, मेडिकल कॉलेज चौक पर भी सड़क हादसे चिंता का बड़ा कारण बन गए हैं
राजनांदगांव । जिले में पिछले कुछ दिनों से सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते सप्ताह भर में अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में आधा दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसों की लगातार बढ़ती संख्या से यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर में वाहनों की तेज रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के साथ ही कई प्रमुख चौक और मार्गों पर डिवाइडर, संकेतक और स्पीड ब्रेकर न होने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। एक दिन पहले बसंत आश्रम क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में एक शिक्षक की मौत हो गई, जबकि एक छात्रा घायल हो गई। इससे पहले टेडेसरा के पास हुए हादसे में तीन दोस्तों की मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं से सड़क पर सफर करने वालों में दहशत का माहौल है।
प्रमुख मार्गों पर कब्जा, आवागमन मुश्किल
शहर के प्रमुख मार्गों और प्रमुख चौक-चौराहों पर वाहनों की पार्किंग तथा अवैध कब्जा और अन्य कारणों से सड़क पर कब्जा होने के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाने से वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है। इससे न केवल दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि आम लोगों को भी आवागमन में दिक्कत हो रही है।
चौड़ीकरण के गड्ढे भी बने मुसीबत
सड़क चौड़ीकरण के लिए कई स्थानों पर खोदे गए गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य भी वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। कई जगह निर्माण क्षेत्र को पर्याप्त तरीके से बैरिकेड नहीं किया गया है। ऐसे में रात के समय तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित होकर इन गड्ढों या अधूरे निर्माण क्षेत्रों में जा सकते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
चालानी कार्रवाई तक सीमित यातायात व्यवस्था?
शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यातायात विभाग का ध्यान मुख्य रूप से चालानी कार्रवाई पर केंद्रित दिखाई देता है, जबकि हादसे रोकने के लिए हाईवे पर गति नियंत्रण, संकेत बोर्ड, डिवाइडर, स्पीड ब्रेकर और सड़क निर्माण एजेंसियों से सुरक्षा मानकों का पालन कराने की जरूरत है। शहर के भीतरी मार्गों में भी यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
स्पीड कंट्रोल के इंतजाम नाकाफी
मेडिकल कॉलेज चौक, बसंती आश्रम चौक और अन्य चौक-चौराहों के लिए से संवेदनशील बन चुके हैं। इन स्थानों पर तेज रफ्तार वाहनों के साथ सड़क की स्थिति और यातायात दबाव भी दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की पार्किंग तथा अन्य कारणों से सड़क पर कब्जा किए जाने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाने से वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है। ऐसे में तेज रफ्तार के साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ रहा है।
शहर और आसपास के प्रमुख मार्गों पर खतरा
शहर और आसपास के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए किए गए इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। कई जगह स्पीड ब्रेकर, पर्याप्त संकेतक और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की कमी महसूस होती है। यही वजह है कि रात के समय तेज रफ्तार वाहन और भी ज्यादा खतरा पैदा कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज चौक पर चार मौतें
मेडिकल कॉलेज चौक पर भी सड़क हादसे चिंता का बड़ा कारण बन गए हैं। यहां अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद चौक पर यातायात को नियंत्रित करने और वाहनों की रफ्तार कम करने के इंतजाम पर्याप्त नजर नहीं आ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस क्षेत्र में सड़क हादसों और यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसे तुरंत सुधारने की जरूरत है।

