राजनांदगांव , जिले के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों टेड़ेसरा, अंजोरा और देवादा से लेकर टोलागांव में बिजली संकट अब सीधे उत्पादन पर चोट कर रहा है। इन क्षेत्रों की 150 से अधिक इंडस्ट्री में पिछले कई दिनों से रोजाना 8 से 10 घंटे तक और कई दफे 12 घंटे तक बिजली बंद हो रही है। बिजली कटौती के दौरान मशीनें बंद रहती हैं और काम करने के लिए पहुंचे मजदूर खाली बैठे रहते हैं। उत्पादन घटने से जहां उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं तैयार माल की सप्लाई और ऑर्डर भी प्रभावित होने लगे हैं।
उद्योग संचालकों के मुताबिक यह स्थिति लगातार कई दिनों से बनी हुई है। बिजली की अनियमित सप्लाई से मशीनें बार-बार बंद और चालू करनी पड़ रही हैं। इससे उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ कच्चा माल, श्रमिकों का समय और मशीनरी की क्षमता भी बर्बाद हो रही है। उद्योगपतियों का कहना है कि मशीन बंद होने के बाद उसे दोबारा चालू होने में भी समय लगता है। ऐसे में बीच-बीच में होने वाली कटौती का असर केवल कटौती के घंटों तक सीमित नहीं रहता।
उद्योगों पर प्रहार: 24/7 चलने वाले प्लांट्स में अचानक पावर कट से पूरी उत्पादन प्रक्रिया ठप हो जाती है। तकनीकी खराबी व नुकसान, मशीनरी का बुरी तरह क्षतिग्रस्त होना, रिस्टार्ट में अधिक समय व ऊर्जा लगती है, ट्रिपिंग के बाद प्लांट रिस्टार्ट करने और सिस्टम को स्टेबलाइज करने में कई घंटों की देरी और भारी ऊर्जा/ईंधन की खपत। आर्थिक एवं सामग्री का नुकसान: कच्चे माल और उत्पादों की बर्बादी होती है। प्रक्रिया बीच में रुकने से रॉ-मटीरियल, केमिकल्स और फिनिश्ड गुड्स पूरी तरह खराब हो जाते हैं। गुणवत्ता में गिरावट: री-स्टार्ट प्रक्रिया के कारण रिजेक्शन रेट और रिजेक्टेड होता है। करोड़ों का वित्तीय घाटा बार-बार ट्रिपिंग और री-स्टार्ट मैनपावर कॉस्ट से होता है।
डिमांड बढ़ी, सप्लाई कम बिजली कंपनी के एमडी भीम सिंह ने कहा कि पिछले कुछ समय से बिजली की मांग अचानक बढ़ी है, जबकि उत्पादन क्षमता उस अनुपात में उपलब्ध नहीं है। स्पीकर से लगाई गुहार बिजली संकट को लेकर औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह से मुलाकात कर समस्या बताई थी। उद्योग संचालकों ने लगातार हो रही बिजली कटौती से उत्पादन, कारोबार पर पड़ रहे असर की जानकारी दी थी।

