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राजनांदगांव : दिग्विजय महाविद्यालय में विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन अतिथियों ने रखें पर्यटन के महत्व एवं उद्देश्य पर विचार

राजनांदगांव : दिग्विजय महाविद्यालय में विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन अतिथियों ने रखें पर्यटन के महत्व एवं उद्देश्य पर विचार

राजनांदगांव : दिग्विजय महाविद्यालय में विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन अतिथियों ने रखें पर्यटन के महत्व एवं उद्देश्य पर विचार

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के तेल चित्र के पूजन एवं माल्यार्पण से हुआ। यह कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर के. के. साहू जैव प्रौद्योगिकी अध्ययनशाला पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. बी एल सोनकर अर्थशास्त्र अध्ययनशाला पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर थे।
प्रोफेसर के.के साहू ने इस अवसर पर पर्यावरण एवं पर्यटन के महत्व साथ साथ सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) की वर्तमान परिदृश्य में प्रासंगिकता के बारे में बताया, उसके उपरांत उन्होंने पर्यटन स्थल की सुरक्षा के विषय में और एवं उस स्थान के महत्व के विषय में बताया कि जहां भी आप घूमने जाएं वहां की स्वच्छता एवं शुद्धता को सुनिश्चित करना आपका कार्य है साथ ही उन्होंने यह बताया कि टूरिज्म केवल घूमना फिरना नहीं है परंतु किसी भी देश के अर्थव्यवस्था में टूरिज्म एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके पश्चात विशिष्ट अतिथि डॉक्टर बी एल सोनेकर ने अपने वक्तव्य में टूरिज्म के विषय में कई महत्वपूर्ण बातों से अवगत कराया। जिसमें संसाधनों का क्या महत्व है इसके विषय में बताया साथ ही संसाधनों के रखरखाव, प्रयोग एवं संरक्षण के विषय में विस्तार से जानकारी दी।इसके उपरांत उन्होंने विद्यार्थी जीवन में स्वयं को कैसे सफल बनाना है इसके विषय में कहा कि किसी प्रकार का तनाव जीवन में नहीं लेना है और चार महत्वपूर्ण बिंदुओं से अवगत कराया पहला शारीरिक शक्ति बनाए रखें, दूसरा आत्मविश्वास, तीसरा आध्यात्मिक दृष्टिकोण विकसित करें और अंतिम में भावनात्मक शक्ति का विकास करे।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कई घूमने फिरने की जगह के विषय में एवं उनके सामाजिक सांस्कृतिक ऐतिहासिक महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि देश के अंदर भी कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जिसे हमें घूमना चाहिए एवं उस स्थल की अच्छी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। आज भी कई जगह ऐसे हैं जो एक्सप्लोर नहीं की गई है। तो आज के युवाओं की जिम्मेदारी बनती है कि उन जगह को खोजें एवं उनके विषय में जानकारी प्राप्त करें साथ ही साथ उसे जगह की रखरखाव एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में वनस्पति शास्त्र विभाग के डॉक्टर त्रिलोक कुमार ने इस कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि कुल वैश्विक आय में पर्यटन सेक्टर की भागीदारी 11.6 ट्रिलियन यू .एस. डॉलर है तथा वैश्विक स्तर में 366 मिलियन लोगों को पर्यटन से रोजगार प्राप्त होते हैं। भारत के संदर्भ में पर्यटन सेक्टर कुल जीडीपी का लगभग 5% हिस्सा रखता है तथा प्रतिवर्ष बहुत सारे अंतरराष्ट्रीय पर्यटक भारत में पर्यटन हेतु आते हैं जिससे विदेशी मुद्रा एक्सचेंज में बढ़ोतरी होती है। इस अवसर पर वनस्पति शास्त्र विभाग के डॉ किरण जैन, डॉ मनीषा यादव, नादिर इकबाल, दामिनी तथा एमएससी के समस्त विद्यार्थी उपस्थित होकर लाभान्वित हुए।

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